अंकल,आप आओगे,ना..?

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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सेवानिवृत कर्मचारियों का समागम चल रहा था। ज्ञान,अनुभव की विरासत लिए सभी वरिष्ठ अपने साथियों (जिन्होंने ७५ वर्ष की आयु पूर्ण की) के स्वागत हेतु एकत्र हुए थे,चूंकि बाबूजी का भी सम्मान होना था,इसलिए मैं भी बिटिया समृध्दि के साथ सभा स्थल पहुँचा। स्वागत की बेला के पूर्व जैन सा. ने माइक थामा और कहा कि,हमारी कार्यकारिणी ने यह तय किया है कि,हम अपने साथियों के जन्मदिवस पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई देने के लिए उनके घर-घर जाकर बधाई देंगे,ताकि मुलाकात के साथ हर्षोल्लास का वातावरण निर्मित किया जा सके। इस सुविचार को जन्म मुझे एक नन्हीं बिटिया ने दिया। हुआ यूं कि कुछ दिन पहले मोबाईल पर अनजान नम्बर से कॉल आया-नन्हीं-सी बिटिया की मधुर आवाज में…अंकल,आप मेरे नाना जी को जानते हो…? मैंने कहा,  नहीं। बिटिया ने नाना जी का नाम बताया तो वह सहकर्मी निकले। हाँ…हाँ,बिटिया, हम तुम्हारे नाना जी को जानते हैं।  बताइए क्या बात है। बिटिया….अंकल, परसों मेरे नाना जी का जन्मदिन है, इसलिए आप जरूर आना। मेरे नाना जी, काफी समय से हँसे नहीं है,दिनभर अकेले और गुमसुम बैठे रहते हैं। आप आएंगे ना….? मासूम की भोली बातें  सुनकर मेरे रौंगटे खड़े हो गए…तत्समय निश्चित किया।…हाँ,बेटा मैं नहीं,हम जरूर आएंगे।
परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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