अंतिम संस्कार

अनन्तराम चौबे ‘अनन्त’
जबलपुर(मध्यप्रदेश)
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अंतिम संस्कार,
जीवन का अंतिम
आखिरी चमत्कार।
जीवन मरण ही,
जीवन का सत्य है।
इन्सान अकेला ही,
यहाँ आता है
अकेला ही जाता है।
माँ की ममता में,
प्रेम प्यार स्नेह पाता है।
माँ का लालन-पालन,
संतान को सुख-दुख
से निजात दिलाता है।
सोच समझ से यहाँ,
मोह माया में भटकता है।
माता-पिता भाई-बहन के
रिश्तों में बंट जाता है।
तेरे-मेरे का भेदभाव,
सामने आ जाता है।
प्रकृति की बनाई,
मोह-माया में भटकता है,
अपने-पराए में बंटता है।
बच्चा युवा जवान बुढ़ापे
से होकर गुजरता है,
अपने अनुभव से ही
अच्छे बुरे मार्ग को
चुनकर चलता है,
कभी संभलता है
कभी ठोकर खाता है।
गिरता है संभलता है,
उठकर आगे बढ़ता है।
अच्छा-बुरा जैसा भी,
करेगा फल पाता है
कभी हंसता है,
कभी रोता है।
जैसा बोया है,
वैसा ही काटता है।
रोते-गाते अपने
अंतिम पड़ाव पर,
पहुंच जाता है।
सांसों को त्यागकर,
जीवन से मुक्ति पाता है।
इन्सान है इसलिए,
अंतिम संस्कार होता है।
मिट्टी के शरीर का,
अंतिम संस्कार कर
जला दिया जाता है।
इन्सान के जीवन का
यही अंतिम सत्य है,
जो विधि-विधान से
पूरा कर दिया जाता है॥
परिचय-मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित नर्मदा नगर में अनन्तराम चौबे का निवास हैं। लेखन के क्षेत्र में काफी सक्रिय श्री चौबे की रचनाएँ विविध समाचार पत्रों में सतत प्रकाशित होती रहती हैं। श्री चौबे का जन्म २१ फरवरी १९५२ में बड़ी देवरी कला में हुआ है। आपका उपनाम अनंत है। आपने उच्चतर माध्यमिक शाला से १० वीं उत्तीर्ण की है। आपने बड़ी देवरी कला (सागर,म.प्र.) से रेलवे सुरक्षा बल (जबलपुर) और यहाँ से फरवरी २०१२ में लेखन क्षेत्र में प्रवेश किया है। लेखन में अब तक हास्य व्यंग्य,कविता,कहानी, उपन्यास के साथ ही बुन्देली कविता-गीत भी रचे हैं। आपका काव्य संग्रह ‘मौसम के रंग’ प्रकाशित हो चुका है। लेखन के लिए श्री चौबे को जबलपुर विश्वविद्यालय ने २०१७ में सम्मानित किया है। श्री चौबे का उपनाम अनंत है। आपके अनुसार १९८५ से ९१ तक जबलपुर के सभी पत्रों में रचनाएं छपती थीl फिर ९२ से २०१४ तक लिखना बन्द कर दिया था,पर १५ से फिर से लिखना शुरू किया हैl आपको २०१७ में `ममतामयी माँ` व `सुनहरा कल` काव्य संग्रह के विमोचन अवसर पर साहित्य सुधाकर अलंकरण से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही साहित्य गौरव सम्मान,शतकवीर सम्मान,साहित्य प्रतिभा सम्मान तथा स्मृति चिन्ह,काका हाथरसी सम्मान- २०१७ तथा प्रतापनारायण मिश्र सम्मान सहित ३३ सम्मानों से सम्मानित किया गया है। आप कई साहित्य मंचों से जुड़े हुए हैं और काव्य गोष्ठियों में रचना पाठ करते हैं। ऑनलाइन पटलों पर भी आपकी रचना प्रदर्शित होती हैं। ३ संयुक्त काव्य संकलन में इनकी कविता छपी है,साथ ही इनकी तीन रचनाओं का साथी की आवाज में आडियो बना है।

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