अकेलेपन को अपना दोस्त बनाओ

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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अकेलापन मानवीय अवस्था का एक पहलू हैl मानव क्या,हर जीव-जंतु,पेड़-पौधे आदि हमेशा से अकेले रहते हैंl मानव को एक सामाजिक प्राणी होने के नाते शुरू से शाला, महाविद्यालय,कार्यालय में संगी-साथी मिलते हैंl वह विवाह करता है,परिवार बनाता है और अपना जीवन यापन करता हैl जैसे जन्म अकेला होता है,उसी प्रकार मृत्यु भी अकेले ही होती हैl अकेलापन वहाँ होता हैं जहाँ एक विचारधारा के लोग मिल जाते हैं,वहां एकांत भी होता है और अकेलेपन का अहसास भी मिलता हैl किसी-किसी की प्रवृत्ति अंतरमुखी होने से वे एकाकी जीवन का लुफ्त उठाते हैंl किसी-किसी का जीवन साथी या मित्र उनको छोड़कर चले जाते हैं,जैसे नौकरी में स्थानांतरण होने से या पति-पत्नी में से किसी एक के वियोग से तो मनुष्य टूट जाता हैl अकेलापन और सामाजिक अलगाव आज के समय में महामारी का रूप लेते जा रहे हैंl तकनीक से भरी इस दुनिया में लोगों का भावनात्मक रूप से जुड़ाव खत्म हो रहा है। लोगों के पास समय की कमी होने से मेल-जोल भी कम होता है,जिसका सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में हमें अकेलापन दूर करने के उपायों के बारे में जानना होगा।अकेलापन इतनी गंभीर समस्या है कि,व्यक्ति तनाव या अवसाद की स्थिति में चला जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव प्रारंभिक मृत्यु दर की जोखिम के साथ जुड़े हुए हैं। आपको बता दें
कि सामाजिक रूप से जुड़े होने से न केवल मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कल्याण होता है,बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि,अकेलापन और सामाजिक अलगाव दोनों के बीच भेद करना महत्वपूर्ण है। सामाजिक अलगाव का मतलब है कि,दूसरे लोगों के सम्पर्क में कमी है,जबकि अकेलापन मन की स्थिति दर्शाता है।
हमें अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं है,जिसकी वजह से हम कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिसका पता हमें बहुत समय बाद लगता है। यदि आप भावनाओं पर काबू रखना सीख जाते हैं तो आप अकेलेपन की समस्या को दूर कर सकते हैं। अकेलेपन को दूर करने के कुछ उपाय-
# रचनात्मक कार्य करने का बेहतर समय-
ऐसा देखा गया है कि अकेलेपन के शिकार लोग अक्सर दूसरों पर निर्भर रहते हैं,इसलिए जब उनके साथ कोई नहीं होता तो वह सुस्त तथा उदास दिखाई देने लगते हैं। इसका एक सकारात्मक दृष्टिकोण भी है कि,यही वह समय है जब अपने अंदर की रचनात्मकता को बाहर निकालें।
# अपने-आप से प्यार कीजिए-
अकेलेपन की समस्या को दूर करना है तो आप अपने-आप से प्यार करना सीखिए। आप क्या हैं ?,उसके बारे में जानने की कोशिश कीजिए। इस तरह आपका लगाव दूसरी चीजों से हटकर खुद पर होगा। आप खुद से प्यार करना शुरू कर देंगेl
# प्रकृति से जुड़ने की कोशिश कीजिए-
अगर अकेलापन दूर करने के उपाय के बारे सोच रहे हैं तो आप प्रकृति को दोस्त बनाएं। आप भौतिक चीजों से दूर हटकर प्रकृति से जुड़ने की कोशिश कीजिए। यह आपके अकेलेपन की समस्या को दूर कर सकता है। आप चाहें तो जानवरों से दोस्ती बढ़ाएं।
# प्रियजनों के साथ समय बिताएं-
अगर कोई खास दोस्त आपके साथ नहीं है,तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप अकेले हैं। खास दोस्तों के अलावा आपके प्रियजन भी आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। अगली बार आपको जब भी अकेलापन लगे तो अपने प्रियजनों को फोन करने में जरा भी संकोच न करें। इससे आपको अच्छा लगेगा और अकेलेपन का अहसास भी नहीं होगा।
# संगीत आपकी मदद करेगा-
अगर आप संगीत सुनने में रूचि रखते हैं,तो यह चीज आपके अकेलेपन की समस्या को दूर कर सकता है। मधुर संगीत को सुनकर आप अपने अकेलेपन से बाहर आ सकते हैं। आपको जिस तरह का संगीत पसंद है,आप उस तरह का संगीत सुनिए। पसंदीदा संगीत सुनने से दिमाग में `डोपामाइन` नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है। डोपामाइन हार्मोंन हमें उत्साहित और प्रेरित भी करता है।
हर व्यक्ति का अपना अपना शौक होता हैl शौक ऐसा होना चाहिए,जिससे किसी को कष्ट न पहुंचेl यदि आपको पढ़ाई-लिखाई का शौक है तो इससे उत्तम कोई अन्य विधा नहीं हो सकती,क्योंकि आप अपने समय का सही उपयोग करते हैंl यदि आपको लेखन का शौक है तो यह सर्वोत्तम होगाl आप आपके वर्षों का चिंतन-मनन लेखन के माध्यम से दूसरों तक पहुँचाने का काम कर सकते हैंl इसके लिए उम्र की भी कोई सीमा नहीं होतीl ऐसे रुचिकर शौक पाल लें,तो दिन-रात का समय कम लगने लगता हैl निराशा या नीरस जीवन से बचने के लिए अपनी रूचि के विषय का चुनाव करें और प्रत्येक क्षण उपयोगी बनाएंl एक लेखक ने अपनी पत्नी के वियोग के बाद लेखन क्षेत्र में उतरकर अल्प समय में ५ उपन्यास लिखे और निरंतर लेखन कार्य करते हुए उनको समयाभाव रहता हैl आज भी उनके लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं और स्वयं उनका एक समृद्ध पुस्तकालय हैl
यह सब मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य का प्रतीक हैं,और उसके आधार पर वह शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता हैl अगर आप हमेशा दुखी भाव में रहेंगे,तब आपसे अन्य लोग कन्नी
काटने लगते हैं,अतः क्यों न समय का सही उपयोग कर जीवंत जीवन जीया जाए ?

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी() आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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