अद्भुत श्रीमद भागवत (युधिष्ठिर सिंहासनारोहण ) भाग -५

नागेश्वर सोनकेशरी
इंदौर(मध्यप्रदेश )
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भाग ५ -………………………
कथा युधिष्ठिर सिंहासनारोहण की
दोहा १
कृष्ण चन्द्र कहने लगे,पग धारो नर नाह।
यह सिंहासन देर से,देख रहा है राह॥
चौपाई
ऋषियों ने और ब्राह्मणों ने,वेद ध्वनि से आह्वान किया।
जगपति ने अपने हाथों से, नरपति को मुकुट प्रदान किया॥
मंगलमुखियों ने मोद सहित, मंगल आरती उतारी है।
दायीं दिशि धर्म सुशोभित है,बाईं दिशि दु्रपद दुलारी है॥
थी शोभा विजय बधाई की,छाई ध्वनि विपुल निशानों की।
नरपति ने पूर्ण प्रतिष्ठा की,ऋषिमूल विप्र मेहमानों की॥
भजन जिसे चाहते हैं मिटा डालते हैं,
जिसे चाहते हैं मिटा डालते हैं,
और जिसे चाहते हैं बना डालते हैं।
खिलाड़ी बने हैं खिलौने,
बना के जिसे चाहा खिला डालते हैं,
और चाहे तो मिटा डालते हैं।
न गोविन्द की कर चिंता आगे को हरगिज
घड़ी में लीला दिखा डालते हैं।
दोहा 2 दिया गया प्रति वीर को,फिर विधिवत जलदान।
घर आए पाण्डव सभी,कर सब वेद विधान॥
दोहा १
घर आकर भी धर्म का,हो न सका दुःखनाश।
उसी समय अतिशीघ्र ही,पहुँचे वेदव्यास॥
चौपाई
बोले राजन रोते-रोते,रोने को मित्र न साथ रहा।
रोए हजार शांति के लिए,फिर भी रोना ही हाथ रहा॥
इसलिए भीष्म के पास चलो,संदेह सभी मिट जाएंगे।
है शांति समय अब उनका भी,क्या जाने क्या कह जाएंगे॥
निरन्तर जारी…………..
परिचय-नागेश्वर सोनकेशरी की जन्मतिथि २५ मई १९७५ और जन्म स्थान मंडला(मध्यप्रदेश )है। आपका  वर्तमान निवास इंदौर स्थित विजयनगर में है। श्री सोनकेशरी की शिक्षा बी.ए. और कार्यक्षेत्र में सहायक आबकारी आयुक्त (आबकारी विभाग,मध्यप्रदेश)हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत संस्थाओं से जुड़कर इंदौर और रतलाम में सेवा देते हैं। आपकी लेखन विधा आलेख है, जिसके प्रेरणापुंज इनके गुरूदेव हैं। आपके इस प्रयास को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख और केन्द्रीय  मानव संसाधन मंत्री भी प्रशंसित कर चुके हैं। सात साल की मेहनत से आपने यह पुस्तक तैयार की है। प्रकाशन में अदभुत श्रीमद भागवत (मौत से मोक्ष की कथा) महापुराण आपके द्वारा सरलता से लिखने के लिए गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं वर्ल्ड बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया है। इनकी विशेष उपलब्धि मात्र ६ माह में इस रचना की  ३२०० पुस्तकों का विक्रय होना है। नागेश्वर सोन केशरी की लेखनी का उद्देश्य-भगवान श्री कृष्ण की भक्ति का प्रचार व प्राप्त राशि से ग़रीब मरीज़ों की सेवा करना है। 

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