अनन्त तक..

अरुण चोयल सिरवी
सरदारपुर(मध्यप्रदेश)

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था शून्य रूप में जब मैं तो साथ तुम्हारा पाया था,
प्राची उदित नभ को देखकर राग प्रेम का गाया था।
की सर्जना अब गीतों की प्यार तुम्हारा पाऊँगा,
साथ रहो तुम मेरे में अनन्त तक तुमको चाहूँगा।
नहीं रहे वो दिन घड़ियाँ जब सुबह तुमसे होती थी,
रात की बातों में जब तुम हँसी-ठिठोली करती थी।
तुम्हारे बिन रहने की कल्पना मुझे भयभीत करती है,
प्रेम राग की ध्वनि तुम आरती मन्दिरों की सजती है।
आ जाओ लौट पुनः तुम हृदय में तुम्हें बसाऊँगा,
साथ रहना,तुम मेरे में अनन्त तक तुमको चाहूँगा॥

परिचय-अरुण चोयल सिरवी की जन्मतिथि २६ नवम्बर १९९७ तथा जन्म स्थान सरदारपुर हैl वर्तमान में ओरेंबुर्ग रूस में रहते हैंl स्थाई निवास ग्राम पिपरनी,तहसील सरदारपुर,(जिला धार-म.प्र.)हैl आप चिकित्सा(एमबीबीएस) की शिक्षा के लिए अध्ययनरत हैंl लेखन विधा में ओज से भरी प्रेम कविता लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज को जाग्रत करना और हिंदी भाषा का प्रचार करना हैl  

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