अनाथ 

 

ओमप्रकाश क्षत्रिय `प्रकाश`
नीमच(मध्यप्रदेश)
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पत्नी की रोज-रोज की चिक-चिक से परेशान होकर महेश पिताजी को अनाथालय में छोड़ दरवाजे से बाहर तो आ गया, मगर मन नहीं मानाl कहीं पिताजी का मन यहाँ लगेगा कि नहीं, यह जानने के लिए वह वापस अनाथालय में गया तो देखा कि पिताजी प्रबंधक से घुल-मिलकर बातें कर रहे थे,जैसे वे बरसों से एक-दूसरे को जानते हैंl

पिताजी के कमरे में जाते ही महेश ने पूछा,-`आप इन्हें जानते हैं ?` तो प्रबंधक ने कहा,-`जी मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूँl वे पिछले ३५ साल से अनाथालय को दान दे रहे हैंl  दूसरी बात यह है कि ३५ साल पहले जिस  बालक को वे इसी अनाथालय से गोद ले गए थे,वहीँ उन्हें यहाँ छोड़ गयाl`

यह सुनते ही महेश के पैरों तले की जमीन खिसक गई,‘वह अनाथ हैl’

 

परिचय-ओमप्रकाश क्षत्रिय का निवास  मध्यप्रदेश के नीमच जिले में है। उपनाम `प्रकाश` से लेखन जगत में सक्रीय श्री क्षत्रिय पेशे से शासकीय विद्यालय में सहायक शिक्षक हैं। इनका जन्म २६ जनवरी १९६५ को हुआ है। आपने शिक्षा में योग्यता के तहत ३ बार बी.ए. और ५ विषयों में एम.ए. किया हुआ है। मध्यप्रदेश के रतनगढ़(नीमच) में बसे हुए होकर आपकी लेखन विधा-बाल कहानी,लेख,कविता तथा लघुकथा है। विशेष उपलब्धि यह है कि,२००८ में २४,२००९ में २५ व २०१० में १६ बाल कहानियों का ८ भाषाओं में प्रकाशन हो चुका है।  २०१५ में लघुकथा के क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट कार्य के लिए आपको जय-विजय सम्मान सहित बालाशोरी रेडी बालसाहित्य सम्मान २०१७, स्वतंत्रता सेनानी ओंकारलाल शास्त्री सम्मान-२०१७ और इंद्रदेवसिंह इंद्र बालसाहित्य सम्मान-२०१७ प्राप्त हुआ है। हिंदी के साथ ही अन्य भाषाओं से भी प्रेम करते हैं। बाल कविता संग्रह-`उड़ा आसमान में हाथी` तथा `चतुराई धरी रह गई` आदि प्रकाशित हैl 

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