अपराध या हादसा….

 बुद्धिप्रकाश महावर `मन`

मलारना (राजस्थान)

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सत्य घटना पर आधारित……
सूरज भी नहीं निकला था,
     कि खबर आई।
दुनिया में ना रही,
     इक माँ की परछाई।
भोली थी,नासमझ थी,
     मासूम दिखती थी।
किसी की बहन लगती वो,
     किसी की बेटी।
सबको मुस्कान देकर,
     कुछ नहीं लेती।
डेड़ माह की कली-सी,
    अभी खिली भी न थी।
माँ के वक्षस्थल से,
    अभी मिली भी न थी।
आँखें प्यारी,तन कुसुम,
    मन सुन्दर होता।
कल्पना से परे जीवन,
    समंदर होता।
चावला-वेदी बनती,
    या आदर्श नारी।
गर्व से सिर ऊँचा,
    देखती दुनिया सारी।
आँखें भी न खुली थी,
    दांत कहाँ से आते।
माँ-बाप का प्यार और,
    लोरी भी सुनाते।
गोद से उठा उसे,
    फिर कांधे पर बिठाते।
सपने दिखा सच्चे-झूठे,
     दुनिया घुमाते।
हाय! क्या हुआ उस रात,
      सब-कुछ बदल गया।
माँ की बगल,बिस्तर से,
     इक प्राण निकल गया।
हुआ सबेरा,गलियों में,
     मच गया कोहराम।
कहाँ गई नन्हीं कली,
     हे मेरे भगवान।
हर जुबां पर बात यही,
    आकर ठहर गई।
ढूंढते-ढूंढते सुबह से,
     अब दोपहर हुई।
पता न चला कहीं,
    जमीं खाई या आसमां।
हार-थक के लोग वहाँ,
     इक जगह हुए जमा।
 अचानक शख्स कोई,
     कुछ कपड़े ला दिखाया।
माँ का कलेजा फट गया,
     हृदय भी रुलाया।
फिर भागे सारे उस ओर,
     हल न निकल सका।
लौटे निराश सबके-सब,
      कैसा हुआ दगा।
गुजरे थे दिन तीन-चार,
     इक खबर आई।
वो नन्हीं जान तो,
    पास कुँए में समाई।
फिर क्या था गांव सारा,
     हुआ खेत-खेत।
निकालकर देखा उसे,
    हो चुकी थी रेत।
अब सवाल यही उठता,
    सबके दिलो-जहन।
आई कैसे बिटिया यहाँ,
     कैसे करें सहन।
न निशान था,न जख्म जरा,
     उसके बदन पर।
इंसान पर शक करें,
     या फिर जानवर पर।
मगर सवाल कौंधता है,
     आज इंसानियत पर।
धिक्कार है `मन` उसकी,
      ऐसी बे-नीयत परl
दया क्यों नहीं आई,
      मासूम-सी गुड़िया पर।
रोएं या हँसें आखिर,
      स्वार्थी दुनिया पर।
इंसान हो या जानवर,
      कुकृत्य एक-सा है।
कौन ले निर्णय ये,
      अपराध या हादसा हैll 
परिचय-बुद्धिप्रकाश महावर की जन्म तिथि ३ जुलाई १९७६ है। आपका वर्तमान निवास जिला दौसा(राजस्थान) के ग्राम मलारना में है। लेखन में साहित्यिक उपनाम-मन लिखते हैं।हालांकि, एक राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ने आपको `तोषमणि` साहित्यिक उप नाम से अलंकृत किया है। एम.ए.(हिंदी) तथा बी.एड. शिक्षित होकर आप अध्यापक (दौसा) हैं। सामाज़िक क्षेत्र में-सामाजिक सुधार कार्यों,बेटी बचाओ जैसे काम में सक्रिय हैं। आप लेखन विधा में कविता,कहानी,संस्मरण,लघुकथा,ग़ज़ल, गीत,नज्म तथा बाल गीत आदि लिखते हैं। ‘हौंसलों के पंखों से'(काव्य संग्रह) तथा ‘कनिका'( कहानी संग्रह) किताब आपके नाम से आ चुकी है। सम्मान में श्री महावर को बाल मुकुंद गुप्त साहित्यिक सम्मान -२०१७,राष्ट्रीय कवि चौपाल साहित्यिक सम्मान-२१०७ तथा दौसा जिला गौरव सम्मान-२०१८ मिला हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक एवं राष्ट्रीय जागृति,पीड़ितों का उद्धार, आत्मखुशी और व्यक्तिगत पहचान स्थापित करना है।

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