‘अमर अकबर एंथोनी’…यादों के झरोखे से

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
*******************************************************

भाग-२…………………
होनी को अनहोनी कर दे
अनहोनी को होनी...
एक जगह जब जमा हो तीनों,
अमर अकबर एंथोनीl


फ़िल्म के निर्देशक मनमोहन देसाई ने जब अमिताभ को फ़िल्म का शीर्षक बताया तो अमिताभ डर गए और बोले,-“मन आजकल पारिवारिक फिल्में चल रही है,जैसे बड़ी बहन, छोटी बहू,तो इसमें इस नाम की फ़िल्म
अमर अकबर एंथोनी कैसे चलेगा।”
इस पर मन मुस्कुरा दिए फिर बोले-“चलेगा चलेगा,दौड़ेगा।”
फिर अमिताभ ने एक मुहूर्त दृश्य जिसमें तीनों नायक अस्पताल में बिस्तर पर लेटे हुए एक वृद्ध महिला को खून दे रहे हैं,समझाया। अमिताभ इस पर बोले कि यह तर्कसंगत दृश्य नहीं है। इस पर भी मन वही बोले
कि अमित तर्क मत खोजो,यह संवेदनाएं हैं,यानी इमोशन्स जो बिकते है देश में।
मनमोहन की फ़िल्म की शूट के दौरान उसी स्टूडियो में दूसरे सेट पर फ़िल्म
‘परवरिश’ का शूट चल रहा था तो मनमोहन दोनों तरफ समय दे रहे थे।
‘अमर अकबर एंथोनी’ का एक दृश्य लगा,जिसमें अमिताभ को आईने के सामने दृश्य करना था। निर्देशक मन ने अमिताभ को अभ्यास का समय दिया और ‘परवरिश’ के सेट पर चले गए। जब वापस आए तो आमिताभ उस दृश्य के फिल्मांकन को पूरा कर चुके थे,तो मन ने पैक-अप कर दिया।
जब फ़िल्म पूरी हो चुकी और स्क्रीनिंग रखी गई,तो मन की आदत थी कि बीच स्क्रीनिंग के किसी को बाहर या अंदर आने जाने की इज़ाजत नहीं होती थी, लेकिन यह दृश्य जब आया यानी अमिताभ का आईने वाला तो मन खुद उठकर थियेटर से बाहर आ गए तो अमिताभ भी पीछे-पीछे बाहर गए।
अमिताभ ने डरते हुए मन से पूछा कि- मन तुम्हें दृश्य पसन्द नहीं आया क्या ?
मन बोले-अब मेरी हर फिल्म में तुम हीरो होंगे।
आगे हुआ भी यही,मन और अमिताभ की जोड़ी ने परवरिश (१९७७),सुहाग (१९७९),नसीब (१९८१),देशप्रेमी (१९८२),कुली(१९८३),मर्द (१९८३) और गंगा जमुना सरस्वती(१९८९),
जैसी फिल्में साथ-साथ की।
ऐसे ही और भी फिल्मी किस्से आपसे साझा करता रहूंगा ‘यादों के झरोखे’ में…।

परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl

Hits: 7

आपकी प्रतिक्रिया दें.