अमावस की रात

वन्दना पुणताम्बेकर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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दीपावली पर्व विशेष, दीप पर्व आपको आलोकित करे…..

ये अमावस की रात,
उजालों की बारात।
हर तरफ जगमगाता,
खुशियों का संसार।
हर तरह महकती खुशी,
दिल फिर भी उदास।
ये अमावस की रात…।।

फुटपाथों पर जी रहे इंसा,
मासूम मन को उजाले,उम्मीदों की आस।
उम्मीदों में ठिठुरती,सुकुड़ती जिंदगी,
कल की आशा,नजरों में प्यास।
ये अमावस की रात…।।

हर तरफ संगीत का शोर,
मिठाइयों का दौर।
किसी अंधेरी गली में सिसकती,
मासूम दर्द में घुटती सांस।
ये अमावस की रात…।।

बेनूर-सा आलम सारा,जगमग,
रोशन जग सारा।
एक माँ की नजरों को सरहद पर,

खड़े बेटे का इंतजार।
ये अमावस की रात…।।

भूखा,प्यासा विवशता से भरा,
ऐसा भी एक समाज।

कहीं किसी दर्द भरी पीड़ा की गुहार।
ये अमावस की रात।

रोशन हुए दीए,
आसमां पर रंगीन छटा की बहार।
सितारों से रोशन सारा जहां।

ये अमावस की रात…।।

सज गए बाजार,तोरण दरबार,
मासूमों के हाथ बिकते दीए,
खिलौनों की बहार।
मन में सिसकती,तोड़ती चाह।
फिर भी जीवन बरकरार।
ये अमावस की रात…।।

सजी आँगन रंगोली,
रंगों की समरसता पहचान।
कहीं मिठाइयों भारी थालियां,
कहीं खाली कटोरे की आवाज,
यह कैसा समाज।
ये अमावस की रात…।।

मन में उजालों के दीप जलाओ,
किसी भूखे की दिवाली मनाओ।
जगमग होगा,मन आँगन खुशियों से रोशन,
आओ मिलकर एक सेवा का दीप जलाएं।
समरसता की ज्योत जलाएं,
दीपावली मनाएँ,सम्पूर्ण समाज जगमगाए।
ये अमावस की रात…।।

परिचय:वन्दना पुणतांबेकर का स्थाई निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। इनका जन्म स्थान ग्वालियर(म.प्र.)और जन्म तारीख ५ सितम्बर १९७० है। इंदौर जिला निवासी वंदना जी की शिक्षा-एम.ए.(समाज शास्त्र),फैशन डिजाईनिंग और आई म्यूज-सितार है। आप कार्यक्षेत्र में गृहिणी हैं। सामाजिक गतिविधियों के निमित्त आप सेवाभारती से जुड़ी हैं। लेखन विधा-कहानी,हायकु तथा कविता है। अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं,जिसमें बड़ी कहानियां सहित लघुकथाएं भी शामिल हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-रचनात्मक लेखन कार्य में रुचि एवं भावनात्मक कहानियों से महिला मन की व्यथा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है। प्रेरणा पुंज के रुप में मुंशी प्रेमचंद जी ओर महादेवी वर्मा हैं। इनकी अभिरुचि-गायन व लेखन में है।

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