अरे मन मेरे

रामनाथ साहू ‘ननकी’ 
मुरलीडीह(छत्तीसगढ)

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संबंधों का नित्य श्रृंगार करो रे मन।
फूलों का अब सिर्फ व्यापार करो रे मन।

बहुत हुई ये दौड़ आगे जाने की अब,
देखो पीछे छूट जाये न हमारा सब।
जो पाया संतोष स्वीकार करो रे मन॥

मृगतृष्णा की अंध गलियों से अब निकलो,
मान प्रतिष्ठा छोड़ स्वादों में मत बहलो।
निज रूप नयन झाँक साकार करो रे मन॥

थकता है तो कर विश्राम जरा चिंतन कर,
छोड़ भटकना आत्म-तीर्थ चल परिभ्रमण कर।
नाद अलौकिक से एकाकार करो रे मन॥

परिचय –रामनाथ साहू का उपनाम ‘ननकी’ है। जन्म तारीख १ जनवरी १९६४ है। इनका वर्तमान एवं स्थाई पता छत्तीसगढ़ स्थित ग्राम-मुरलीडीह (जिला-जांजगीर,चांपा)है। भाषा ज्ञान हिन्दी का है। ननकी की शिक्षा-बी. काम. है। कार्य क्षेत्र-कृषि है।सामाजिक गतिविधि के तहत संगीत एवं साहित्य की रूचि बढ़ाने में सक्रिय हैं। इनकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,भजन एवं छंद बद्ध रचना है। ब्लॉग पर भी विचार रखने वाले श्री साहू की लेखनी का उद्देश्य-आत्म रंजन के साथ ही जन जागृति है। इनके लिए प्रेरणा पुंज-समय और प्रकृति है।

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