अल्हड़ता 

लिली मित्रा
फरीदाबाद(हरियाणा)
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कल शाम की ही बात है,मुझे चिकित्सक के पास अपनी नियमित जांच के लिए जाना था। मैं और पतिदेव कार से घर की तरफ लौट रहे थे। शाम के करीब ७ या ७:३० का समय रहा होगा। उस सड़क पर बहुत से दफ्तर,कोचिंग सेन्टर,दुकान वगैरह थीं,कुल मिलाकर चहल-पहल वाला इलाका था।
         मैंने देखा,एक किशोरी उम्र १६-१७ के आस-पास रही होगी,पीठ पर एक पिट्ठू बैग लिए अपनी ही धुन में मस्त थी।शायद कोचिंग क्लास से निकली थी। उसे न अगल-बगल चलने वालों की फिक्र थी,न उसकी स्वाभाविक सी अलमस्तता को घूरने वालों का ध्यान।
      उसकी अल्हड़ता ने मेरा भी ध्यानाकर्षण कर लिया। मुझे अच्छी लगी उसकी यह मस्ताई-सी उम्रानुकूल अदा।
       सामने से उसी उम्र के कुछ नवयुवक आते दिखे। उन लड़कों की एक अजीब-सी ललचाई नज़रों की लेज़र दृष्टि कुछ ही क्षणों में उस कन्या को नख से शिख तक भेदकर गुज़र गई,पर वह लड़की इन सबसे बेखबर सड़क पार कर निकल गई।
        मेरे दिल और दिमाग में छेड़ गई विचारों का घमासान…। कभी विचार आता था,-‘उस किशोरी को सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी अल्हड़ता नहीं दिखानी चाहिए…।’
तो कभी ख्याल आया-‘यदि देखा जाए, लिंग भेद से परे लड़कियां भी तो एक मनुष्य हैं…!!! यदि पुरूष वर्ग के लिए सड़कों या अन्यत्र कहीं भी किसी प्रकार की लोक-लाज,मर्यादा की सीमा-रेखा से परे रह अल्हड़पन करने को स्वतंत्र है,तो फिर महिला वर्ग क्यों नहीं…??
     मैं बस इसी वैचारिक द्वंद में उलझती रही,कार में रेडियो बज रहा था। कोई अच्छा गाना बीच-बीच में ध्यान खींच रहा था,पर वह घटना भी मस्तिष्क के किसी भाग में अपनी अल्हड़ता लिए झूम रही थी।
वैसे यह कोई नई बात नहीं थी। रोज़मर्रा के जीवन में आए-दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं,और मेरी आंखों के कैमरे में ऐसी कई तस्वीरे कैद हैं। बस,नहीं है तो केवल इन तस्वीरों में कैद मेरे प्रश्नों के सटीक सटीक निष्कर्ष…।
परिचय- ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय लिली मित्रा का निवास फरीदाबाद (हरियाणा)में है। आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर(राजनीति शास्त्र) किया है एवं लेखन तथा नृत्य के प्रति विशेष लगाव से कार्य निष्पादन करती हैं। लिली मित्रा की रचनाएं कई ऑनलाइन पत्रिकाओं में श्रेष्ठ रुपक एंव श्रेष्ठ ब्लाॅग के रुप में चुनी गई हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन काव्य,बाल कविताएं,कहानियां एवं लघुकथा के रुप में हो चुका है। श्रीमती मित्रा हिन्दी भाषा के प्रति स्वाभाविक आकर्षण रखती हैं। इनके अनुसार भावनाओं की अभिव्यक्ति साहित्य एवं नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करने का यह आरंभिक सिलसिला है। इनकी रुचि नृत्य,लेखन,रसोई और साहित्य पाठन विधा में भी है। कुछ समय पहले ही लेखन शुरू करने वाली श्रीमती मित्रा बतौर गृहिणि शौकिया लेखक हैं। आपकी विशेष उपलब्धि में एक समूह द्वारा आयोजित काव्यलेखन स्पर्धा में दिल्ली के ‘एवान-ए-ग़ालिब’ में ‘काव्य शिखर’ सम्मान,ऑनलाइन वेबसाइट पर कई लेख ‘बेस्ट ब्लाॅग’ एंव ‘फीचर्ड’ सहित एक वेबसाइट पर दो बार ‘शीर्षस्थ कवि’ सूची में नाम आना है। लेखन विधा-स्वतंत्र सृजन,आलेख,बाल रचनाएं है। आपकी लेखनी का उद्देश्य हिन्दी भाषा के प्रति अनुराग है।

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