आँखें

वीरेन्द्र कुमार साहू
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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आँख मारकर उससे,मैंने आँखें चार की,
आँख खुली तो देखा,उसने आँखों से वार कियाl 
 
आँख हमारी आई तो,आँखें फेरकर चली गई,
आँख मिला न सकी वो,आँख हमसे मली गईl 
 
आँखें बिछाकर बैठे थे हम,आँखें पथरा गई,
आँखें बदल गई उनकी,आँखें दिखाकर भाग गईl 
 
कभी आँख की पुतली थे,अब आँखों के कांटे हैं,
आँख बचाकर हमसे वो,हम पे ही आँख गड़ाते हैंl 
 
आँख उठाकर देखती क्या,उसकी आँखें नीचे हो गई,
मेरी आँखों में गिरकर,उसकी आँखों में पानी भर गयाl 
 
हमने आँखें मूंद ली तो,आँखें मिलाने आ गई,
आँख लगाकर हमको वह,आँख सेंककर चली गई॥
परिचय-वीरेन्द्र कुमार साहू का जन्म १५ दिसम्बर १९८७ को बोड़राबांधा (राजिम) में हुआ हैl आपका वर्तमान निवास ग्राम-बोड़राबांधा,पोड़(पाण्डुका),जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)हैl यही स्थाई निवास भी हैl छत्तीसगढ़ राज्य के श्री साहू ने एम.ए.(हिन्दी) और डी.पी.ई. की शिक्षा प्राप्त की हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत स्वयं के समाज में सेवी हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,कविता हैl ब्लॉग पर भी सक्रिय लेखन करते हैंl वीरेंद्र साहू की लेखनी का उद्देश्य-भावों की अभिव्यक्ति से नवजागरण करना हैl 

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