आँख के आँसू पिये

वन्दना शर्मा
अजमेर (राजस्थान)

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जिंदगी ने जख्म कुछ ऐसे दिए,
मुस्कुराकर आँख के आँसू पिये।

चाहकर भी चोट पर रोए नहीं,
गम छुपा दामन में सारे भर लिए।

आज भी नासूर बनकर चुभ रहे,
याद की बस्ती ने ताजा कर दिए।

कुछ हकीमों ने बड़े उपचार कर,
चंद खुशियों से पिरोकर सिल दिए।

सबने समझा था हम खुश हैं बहुत,
ओढ़कर खुशियों का बुरका चल दिये।

जख्म ये ऐसे हैं कि भरते नहीं,
पहनकर माला में इनको चल दियेll

परिचय-वंदना शर्मा की जन्म तारीख १ मई १९८६ और जन्म स्थान-गंडाला(बहरोड़,अलवर)हैl वर्तमान में आप पाली में रहती हैंl स्थाई पता-अजमेर का हैl राजस्थान के अजमेर से सम्बन्ध रखने वाली वंदना शर्मा की शिक्षा-हिंदी में स्नातकोत्तर और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी के लिए प्रयासरत होना हैl लेखन विधा-मुक्त छंद कविता हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य- स्वान्तःसुखाय तथा लोकहित हैl जीवन में प्रेरणा पुंज-गुरुजी हैंl वंदना जी की रुचि-लेखन एवं अध्यापन में हैl

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