आँसू कितने सस्ते हैं

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी
कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)

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खुशहाली महंगी है कितनी आँसू कितने सस्ते हैं,
क्यों आते हैं आँखों में ये दुनिया वाले हँसते हैं।

हम तो पीड़ा झेल रहे हैं काँटे हैं अंगारे भी,
अंधेरों में डूब गये हैं सूरज चाँद सितारे भी।
सूझे ना मंजिल क्या अपनी और किधर को रस्ते हैं-
खुशहाली महंगी है कितनी आँसू कितने सस्ते हैं।
क्यों आते हैं आँखों में ये दुनिया वाले हँसते हैं॥

जीवन की दुश्वारी को जब जब हमने सुलझाया है,
राहों ने ही राह हमारी रोक हमें उलझाया है।
हमको जिसने घेर लिया वे गम के सारे दस्ते हैं-
खुशहाली महंगी है कितनी आँसू कितने सस्ते हैं।
क्यों आते हैं आँखों में ये दुनिया वाले हँसते हैं॥

जीवन का तो खेल खत्म जाने किसकी तैयारी है,
दिखता है हल्का लेकिन ये पल-पल होता भारी है।
मन बच्चा है मन के ऊपर मन-मन भर के बस्ते हैं-
खुशहाली महंगी है कितनी आँसू कितने सस्ते हैं।
क्यों आते हैं आँखों में ये दुनिया वाले हँसते हैं॥

जबसे रोजी-रोटी ने भी दामन अपना छोड़ा है,
जिसको पाई-पाई जोड़ा उसने ही दिल तोड़ा है।
जो अपने थे वही दूर से करते आज नमस्ते हैं-
खुशहाली महंगी है कितनी आँसू कितने सस्ते हैं।
क्यों आते हैं आँखों में ये दुनिया वाले हँसते हैं॥

परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में भी कुशीनगर में ही हैं,और स्थाई पता यही है। स्नातक तक शिक्षित श्री कुशवाहा क़ा कार्यक्षेत्र-शिक्षण(शिक्षक)है। आप सामाजिक गतिविधि में कवि सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक बुराईयों पर प्रहार करते हैं। आपकी लेखन विधा-काव्य सहित सभी विधाएं है। किताब-‘सब रोटी का खेल’ आ चुकी है। साथ ही विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आपको गीतिका श्री (सुलतानपुर),साहित्य रत्न(कुशीनगर) शिल्प शिरोमणी सम्मान(गाजीपुर)प्राप्त हुआ है। विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी से काव्यपाठ करना है। आकाश महेशपुरी की लेखनी का उद्देश्य-रुचि है। 

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