आँसू

 

श्याम मठपाल ‘जिज्ञासु’
उदयपुर (राजस्थान)

**************************************************************************

आँख के आँसू बाढ़ हो गए,

बर्षों के रिश्ते तबाह हो गएl

जर्रे-जर्रे ने आवाज दी,

हर फूल-पत्ते गवाह हो गएl

सदा पलती रही मोहब्बत जहाँ,

अब क्यों ऐसे हालात हो गएl

दर्द सबका एक-सा है,

क्यों ऐसे गुनाह हो गएl

साथ जीने-मरने की कसमें,

अब क्यों कत्लगाह हो गएl

तुमसे आबाद थी जिंदगी,

तुम्हारे बगैर फना हो गएl

उम्र यूँ ही गुजरती नहीं,

मिल-बैठकर सुलह हो गएl

परिचय-श्याम मठपाल का साहित्यिक उपनाम-जिज्ञासु हैl जन्म तारीख २४ नवम्बर १९५५ तथा जन्म स्थान-अल्मोड़ा हैl वर्तमान में राजस्थान के उदयपुर स्थित सेक्टर-७ में निवासरत हैंl यही आपका स्थाई पता हैl उदयपुर निवासी श्री मठपाल ने बी.कॉम.एम.कॉम. एवं जी.डी.एम.एम. की शिक्षा प्राप्त की हैl वर्तमान में सेवानिवृत्त श्री मठपाल का कार्यक्षेत्र निजी संस्थान में वरिष्ठ प्रबंधक का रहा हैl सामाजिक गतिविधि में आपका कार्य पर्यावरण सरंक्षण के लिए योगदान,जल व ऊर्जा बचत के लिए कोशिश,झीलों की सफाई में शामिल होना,रेलवे स्टेशन,बस स्टैण्ड व सार्वजनिक स्थानों पर हमेशा सफाई का पूरा ध्यान रखना व लोगों को प्रेरित करना हैl इनकी लेखन विधा-कविता, गीत,ग़ज़ल,लघु कथा,क्षणिकाएं,हाइकू,दोहे,मुक्तक व किसी भी विषय पर लेख लिखना हैl `इंद्रधनुष के पीछे के रंग`(कविता संग्रह) आपके नाम से आ चुका है तो,रचनाओं का प्रकाशन कई दैनिक पत्र-पत्रिकाओं में जारी हैl आपको प्राप्त सम्मान में सर्वोत्तम पत्र पुरस्कार और उत्तराखंड समिति द्वारा सम्मान हैl विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी से समय-समय पर कविताएँ प्रसारित होना तथा रेडियो के माध्यम से किसी भी सामाजिक विषय पर अपने विचार रखना सहित बड़े कवि सम्मेलनों में भागीदारी हैl श्याम मठपाल की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान देना,प्रेम व भाईचारे को बढ़ावा देना,लोगों में देश-भक्ति की भावना को बढ़ाकर मजबूत करना हैl आपके जीवन में प्रेरणा पुंज-परमहंस योगानंद हैंl आपकी विशेषज्ञता-व्यवसाय में हैl इनकी रुचि-पढ़ना,लिखना,रेडियो सुनना, योग,व्यायाम,ध्यान तथा स्पर्धाओं में भाग लेना आदि हैl

Hits: 98

आपकी प्रतिक्रिया दें.