आँसू

कृष्ण कुमार सैनी ‘राज’
दौसा(जयपुर )
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बच्चे का रुदन
उसके आगमन से
होता शुरु।
हर दर्द के साथी
आँसू।
व्यस्क होने पर
छुप कर रो लेता।
माता-पिता से भी
नहीं कुछ कहता।
कभी प्रेम में
ठुकराए कोई।
रोकर वह दर्द
पी लेता है।
नौकरी न मिले तो,
बेरोजगारी होने
का दंड रोकर
भोग लेता है।
कोई क्या जाने,
उसकी पीड़ा।
बस लेखनी से
कह देता है।
पन्ने पर आँसू गिरते,
शब्द बनते-बिगड़ते हैं।
कुछ भी कहो,आँसू
ही अपने होते हैं।
आती प्रिय की याद नैन से,
झर-झर बहते हैं आँसू
पलकें जातीं भीग याद में अपनों की,
कट जाती है रात गोद में सपनों की
जन्म से लेकर मृत्यु तलक,
दुख सहते रहते हैं आँसू
हर शिशु पैदा होते ही है रोता,
बालकपन में जिद कर नैन भिगोता
बेकारी में भागदौड़ से,
परेशान हो भरी जवानी नित दु:ख ढोता
छोड़ अकेला जाए कोई,
तब निर्झर से झरते आँसू॥
परिचय : कृष्ण कुमार सैनी ‘राज’ की शिक्षा एम.ए.(राजनीति विज्ञान) और बीएसटीसी(जयपुर )है। आपकी जन्म तिथि-२८ अप्रैल १९९५ है,और पिताजी द्वारा स्थापित फूलों के व्यवसाय को आप भी सम्भालते हैं। निवास राजस्थान राज्य के जिला दौसा स्थित  मारुति कालोनी में है। श्री सैनी की रुचि कविता,ग़ज़ल,गीत,शायरी,मुक्तक,व्यंग्य लिखने में है तो भजन-कीर्तन सुनने का भी शौक है। सम्मान और साहित्यिक उपलब्धि में आपके खाते में बीकानेर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन(२०१६)में काव्य पाठ करने-सम्मानित होने का सौभाग्य है तो दौसा और जयपुर में भी कवि सम्मेलन में पाठ किया है। जयपुर में २०१६ में कवि सम्मेलन में चंचरीक स्मृति सम्मान,जिले लखीमपुर खीरी में २०१७ में माधव वाजपेयी स्मृति सम्मान,अयोध्या में युवा प्रतिभा सम्मान सहित रचना शतकवीर सम्मान तथा कवि चौपाल सम्मान आदि हैं। आप बीकानेर की साहित्यिक संस्था से दौसा के शाखा अध्यक्ष एवं संस्थापक हैं। सेवा कार्यों में सक्रिय होकर सेवा समिति के माध्यम से गरीबों के लिए भोजन,कपड़ा एवं आवश्यक वस्तुओं का वितरण एवं गर्मियों में जगह जगह पानी व शरबत की प्याऊ लगाते हैं। बच्चों एवं बड़ों को योग सिखाने का कार्य एवं निःशुल्क वृक्ष वितरण,घायल व बीमार पक्षियों का निःशुल्क इलाज करना तथा मासिक काव्य गोष्ठी करना भी शामिल है।

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