आओ `विजन-२०२०` की ओर चलें

राजेश पुरोहित
झालावाड़(राजस्थान)
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 आओ `विजन दो हज़ार बीस` की ओर चलें। सबको विजन-२०२०` क्यों पूरा करना चाहिए,इसका सीधा उत्तर है हम दो हज़ार बीस तक हमारे देश को विकासशील से विकसित बनाएंगे। जो विजन हमें कलाम साहब ने दिया,उसे पूरा करना है।
     संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर देश के लिए कार्य करेंगे। किसी भी दल के नेता हों,सरकार में सत्तासीन पार्टी कोई भी हो,सभी का एक लक्ष्य विजन-२०२० होना चाहिए।
  हर साहित्यकार-पत्रकार-लेखक-रंगकर्मी-कलाकार का प्रयास हो कि वह विजन-२०२० की जंग लड़े। अब आज़ादी की लड़ाई नहीं लड़नी। अब तो देश विकसित कैसे हो,इस कार्य में जो बाधक हो उससे लड़कर जीतना है। हर टीवी चैनल,रेडियो स्टेशन,हर धार्मिक स्थल एवं संस्थाएं विजन-२०२० को पूर्ण करने हेतु ललकार करे। हर सामाजिक संस्था विजन-२०२० के लिए पूरा अलग से कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वित करे। हर दार्शनिक विजन पूरा करने के लिए दर्शन सामने रखे। आज कलाम के नाम पर कलाम केन्द्र २००० हो गए हैं,यह भारत का विजन दो हज़ार बीस की तरफ तेजी से बढ़ने का संकेत है। कलाम साहित्य व कलाम के विचार जन-जन तक पहुंचाने का काम होना चाहिए। राष्ट्रवादी साहित्य हेतु कवि सम्मेलन गाँव-गाँव में हो। हर गांव- हर शहर,शाला-महाविद्यालय धर्मग्रंथ से आएगा,कर्मवीर की कुटिया से आएगा। २१वीं सदी के युवाओं के विकासशील विचारों एवं कार्यों से आएगा।
  हम अपने जीवन में दस संकल्प पूर्ण कर विजन-२०२० हेतु जुड़कर कार्य करें। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप न लगाएं।
पहला-मैं पूर्ण समर्पण से अपनी पढ़ाई या कार्य को पूरा करूँगा, और उसमें अच्छे से अच्छा करूँगा। दूसरा संकल्प-मैं कम से कम ऐसे दस लोगों को पढ़ाऊंगा,जो ना तो पढ़ सकते हैं ना लिख सकते हैं। तीसरा संकल्प-मैं कम से कम दस पौधे लगाऊंगा और लगातार उनकी देखभाल करूँगा और उनकी वृद्धि को सुनिश्चित करूँगा। चौथा संकल्प-शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर कम से कम पांच लोगों को बुरे व्यसन से छुड़ाने के लिए कठिन मेहनत करूँगा। पाँचवा संकल्प-मैं अपने बन्धु-बाँधुओं के दुखों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास करूंगा। छठा संकल्प-मैं किसी प्रकार के धार्मिक,जातिगत और भाषागत भेदभाव का समर्थन नहीं करूँगा। सातवां संकल्प-मैं ईमानदार बनूँगा एवं दूसरों को अनुकरण करने के लिए स्वयं एक उदाहरण बनूँगा। आठवां संकल्प-मैं एक जागरूक नागरिक बनने की दिशा में कार्य करूँगा। अपने परिवार को साहसी बनाऊंगा। मैं हर महिला का सम्मान करूँगा और नारी शिक्षा का समर्थन करूँगा। नवां संकल्प-मैं दिव्यांग लोगों का हमेशा मित्र या सहयोगी रहूँगा और उन्हें स्वस्थ लोगों की तरह बनाने का पूरा प्रयत्न करूँगा। दसवां संकल्प-मैं अपने देश एवं जनता की सफलता की गर्व सहित प्रशंसा करूँगा।
   सभी युवाओं को ऐसे ही लक्ष्य निर्धारित करना होगा। युवा हमारे राष्ट्र की शक्ति हैं। युवाओं की शक्ति देश हित में लगे,ऐसा प्रयास हो।
    `मिसाइल मैन` अब्दुल पाकिर जेनुएल अब्दुल कलाम जो भारत के पूर्व राष्ट्रपति रहे,उन्होंने २०२० तक भारत को एक आर्थिक महाशक्ति बनाने एवं ग्रामीण जनता के विकास के साथ- साथ भारत की शिक्षा व्यवस्था,तकनीकी व प्रौद्योगिकी के विकास हेतु जो विजन प्रस्तुत किया वह है `विजन-२०२०`। भारत दो हज़ार बीस तक सभी क्षेत्रों में प्रगति करेगाl युवाओं को रोजगार के कैसे अवसर सुलभ होंगे,देश का किसान कैसे फसल दोगुनी ले सकेगा,विद्यार्थी विज्ञान तकनीकी का ज्ञान अर्जित कर कैसे आगे बढ़ेंगे,व्यापारी कैसे माल का उत्पादन बढ़ा लेंगे,ये सब विजन-२०२० में कैसे पूर्ण होंगे। इस समग्र विजन का नाम है विजन-२०२०। हमारा देश सामाजिक रूप से विकसित हो जाएगा। आज हर भारतीय को विश्वसनीयता के साथ काम करने की जरूरत है। देश के लिए एक शिक्षक ज्ञान बांटता है,वह भी विजन २०२० का लक्ष्य हासिल करने की ओर बढ़ रहा है।
    हमें भारत की युवा पीढ़ी को सच्चा देशसेवक बनाना होगा। आज सोशल मीडिया पर ४  चित्र डालकर लोग पर्यावरण बचाने का ढोंग कर रहे हैं,ये कैसी देशसेवा है। स्वयं को प्रसिद्ध करने या झूठी प्रसिद्धि पाने के लिए लोग नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। पेड़ कटते जा रहे,ये देशसेवा नहीं। इससे भारत माँ का आँचल हरा-भरा नहीं होगा। छोटे-छोटे काम कर हम देशसेवा कर सकते हैं। घर की सफाई सभी करते हैं,कभी गली-मोहल्ले की भी करिए,बड़ा सुख मिलेगा। अपने लिए सभी जीते हैं,दूसरों की भलाई के काम करके देखिए,आपका मन कितना शांत हो जाता है।
  भारत में गरीबी बढ़ती जा रही है,तेजी से देश की जनसंख्या बढ़ रही है,पर देश में शिक्षा का अभाव है। बेरोजगारी हो,विकास की गति जहाँ धीमी हो,वहां आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमारे देश की ये सभी समस्याएं यथावत खड़ी हैं। हमें लगता है कि अब देश की सारी व्यवस्था चौपट हो जाएगी,परंतु हम ऐसा सोच सकते हैं लेकिन पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब ने कहा था कि यदि हर भारतीय मेहनत से काम करे तो दो हज़ार बीस तक हम विश्व के पाँच सबसे अधिक शक्तिशाली समृद्ध देशों में सम्मिलित हो सकते हैं। उनकी कृति `भारत २०२० नव निर्माण की रूपरेखा` में इस तथ्य का उल्लेख है। यह पुस्तक जापान,अमेरिका जैसे विकसित देशों के अनुकरण पर भारत सरकार द्वारा कराए गए विशिष्ट एवं व्यापक अध्ययन से तैयार की गई हैl इसमें सभी क्षेत्रों के वैज्ञानिकों,विशेषज्ञों,समाजसेवी संस्थाओं,पत्रकारों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया। खनिज,इंफोटेक,अर्थ, अनुसंधान,खेती,उद्योग,समाज,स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों के आंकड़ों को इसमें सम्मिलित किया गया है।
   भारत में न्यूक्लियर बम के निर्माता डॉ.कलाम ने अपने भाषण के बाद एक दस वर्ष की लड़की(जो उनमें हस्ताक्षर लेने आई थी) से पूछा-`तुम्हारी महत्वाकांक्षा क्या है ?` वह लड़की बोली-`मैं एक विकसित भारत में जीवन बिताना चाहती हूं।` कलाम साहब ऐसे ही करोड़ों लोगों के लिए भारत को विकसित बनाने का विजन बता कर गए हैं।
   हम भारतवासी अपनी दरिद्रता की वर्तमान दशा से ऊपर उठने का कार्य करें। शिक्षा,स्वास्थ्य,आत्मसम्मान की उनन्त हो रही स्थिति को आधार बनाकर देश की प्रगति में योगदान करने हेतु तत्परता से काम करें।
  हमारा विश्वास है कि प्रज्वलित युवा मस्तिष्क प्रबल संसाधन होते हैं। ये धरती के ऊपर आकाश में तथा जल के नीचे छिपे किसी भी संसाधन से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। हम सभी को मिलकर विकासशील भारत को विकसित भारत बनाना होगा,जिसके पास जो हुनर है,उसका उपयोग देश की सेवा में करें। इस हेतु हमें सबसे पहले मानसिक रूप से तैयार होना होगा।
 `विजन दो हज़ार बीस पूर्ण करें।`
  कलाम के सपनो को साकार करेंll`

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