आखरी खत साल २०१८ के नाम.

हेमा श्रीवास्तव ‘हेमाश्री’
प्रयाग(उत्तरप्रदेश)

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प्रिय साल २०१८,
आशा है तुम अपने इन १२ महीनों में अपने सभी कर्तव्य निर्वहन करके जा रहे हो,फिर वह अच्छे हो या खराब तुम्हारा समय पूरा हुआ। अभी तक तुमने जो कुछ पाया,जो कुछ खोया उसका हिसाब लगाकर जा रहे हो,किसी को तुमने बहुत अच्छा समय दिया और किसी को बहुत बुरा,लेकिन इसमें तुम्हारा दोष नहींl यह तो प्रकृति है,जो समय चक्र से बदलती रहती है मानती हूँ लोग यह वह पालते हैं कि,कैलेण्डर बदलने से लोगों के दिन बदल जाते हैं,पर ऐसा नहीं होताl यह तो मात्र तिथि और पंचांग परिवर्तन होता हैl सुनो,विशेष ऐसा कुछ नहीं होता जिसके हिसाब से कहा जा सके कि,इंसान का भविष्य बदल जाएगा भविष्य तो तब बदलता है,जो इंसान उस दिशा में सकारात्मक ऊर्जा लगाकर पूर्ण प्रयास करता हैl प्रिय २०१८,तुमने बहुत से झंझावातों को देखा और बहुत सारे सुखमय पल भी बिताए। किसी ने तुम्हारी शुरुआत में सफलता पाई,और किसी ने अंत में, वहीं किसी ने किसी को अपना बनाया और कई ने अपनों को खोया। देश की सरहद पर जो शहीद हुए,आतंकवाद के चपेट में जो लोग मारे गए तेज बारिश के बहाव में जो लोग बह गए जिनके घर उजड़ गए,उन लोगों की संवेदनाएं तुम अपने साथ समेट के जा रहे हो। जिन लोगों ने नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए,अपने भविष्य में सुनहरे शब्दों के दीप प्रज्वलित किए,देश के लिए गरिमा और सम्मान एकत्रित किया,विभिन्न कार्यक्रमों और प्रशिक्षण के माध्यम से कितनों का भविष्य उज्जवल हुआl राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न खेल स्पर्धाओं में जिन खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया,फिल्मी सितारों ने तमाम दर्शकों का दिल बहलाने में सफलता पाई,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्चस्तरीय वार्ता देश के आर्थिक राजनीतिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ बनाने के लिए जिन्होंने प्रयास किया पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण अंचल के विकास के लिए जिन्होंने काम किया,उन सभी के लिए तुम्हारा समय अच्छा रहा।
विश्व और राष्ट्र स्तर न जाने कितने कार्यों का सम्पादन निष्पादन हुआ और हमारे देश भारत की सवा सौ करोड़ से ज्यादा देशवासियों की तमाम क्रियाओं के तुम साक्षी रहे। तमाम छोटे-बड़े किस्से तमाम छोटे-बड़े हादसे तमाम छोटी-बड़ी घटनाएं तुम्हारे दामन का हिस्सा रही। मैंने भी तुमसे बहुत कुछ सीखा,तुम्हारे समय में कुछ अच्छी यादगार घटनाएं हुईl मैंने जो प्रयास किया,उसके अनुसार मुझे भी कुछ अच्छा और कुछ खराब समय देखना पड़ाl विशेष तौर पर मेरी माँ की तबीयत बहुत बिगड़ी और फिलहाल वह ठीक भी हो गईl मेरा समय शायद अभी और बदलना चाहिए,जिसके लिए प्रयास जारी है तुम्हारे आंचल में मैंने सुख-दुख दोनों देखे,किंतु जो बीत गया उसका मलाल नहीं हैl जो नहीं कर सकी,उसे पूर्ण करने का धैर्य मन में बाकी है,आशा करती हूँ तुम्हारे पीछे पूरी हों,इन सबके उपरांत भी तुम एक वर्ष रहे। इसलिए,तुम्हें मुस्कुराते हुए विदा करूंगी और २०१९ हँसता हुआ सबको खुशी दे,यही दुआ करूँगी।
शेष ठीक है,बाकी ३०१८ में मिलने पर…l

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