आजकल जाति-धर्म गरीब

अंजनी मिश्रा ‘कुमार’
सतना(मध्यप्रदेश)

*************************************************************
लोग नहीं,आजकल,
जाति,धर्म गरीब होने लगे हैंl
आपस में लड़ रहे जानवरों से,
इंसानियत खोने लगे हैं।

कहीं जाट तो कहीं पाटीदार,
दंगा करते हैं।
अपने मतलब की खतिर
देश को(इंसानियत को) नंगा करते हैं।

करते बड़ी सभाएं और
लोगों को भड़काते हैं।
मतलब की खतिर मारो-काटो,
यही हमें सिखलाते हैं।

बहकावे में हम इनके,
बहुत गलत काम कर जाते हैं।
मेहनत सारी हमारी होती है,
और फसल ये ले जाते हैं।

मतलब की खातिर आपस में लड़ाना,
अब तो इनका धंधा हो गया है।
दूसरे के घाटे से करेंगे फायदा खुद का,
ये खेल राजनीति का कितना गंदा हो गया है॥

परिचय- अंजनी कुमार मिश्रा का साहित्यिक उपनाम ‘कुमार’ है। इनका जन्म स्थान-सतना(मध्यप्रदेश) तथा  जन्म तारीख १२ जून २००० है। वर्तमान में मंडीदीप, रायसेन(मध्यप्रदेश) में बसे हुए हैं और स्थाई पता सतना ही है। हिन्दी,अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखते हैं। इनकी शिक्षा बी.कॉम.(अध्ययनरत-द्वितीय वर्ष)है। लेखन विधा-कविता(मुक्तछंद)है। ‘कहने दो एहसास मुझे'(साझा काव्य संग्रह) में रचना प्रकाशित हुई है। लेखनी का उद्देश्य-जब मन करे,तब लिखना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-स्व. गोपालदास नीरज एवं कुमार विश्वास हैं।

Hits: 11

आपकी प्रतिक्रिया दें.