आता हो जिसको वक़्त की रफ़्तार देखना

डॉ.नसीमा निशा
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
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आता हो जिसको वक़्त की रफ़्तार देखना।
लम्बी चलेगी फ़िर वही सरकार देखनाll

अच्छा नहीं सनम है ये हर बार देखना,
और वो भी मेरे सामने लाचार देखनाll

खुदगर्जियों में ऐसे ही डूबे रहें जो हम,
हो जायेगी ये ज़िन्दगी दुश्वार देखनाll

हैं क़त्ल और अस्मतों की लूट से भरे,
अच्छा नहीं है रोज़ यूँ अख़बार देखनाll

जब-जब गिरेगा दोस्तों इंसान का मयार,
उठेगा फ़िर कहाँ से ये बाज़ार देखनाll

मिश्गाने `निशा` देखकर हैरतज़दा हूँ मैं,
क़ातिल को देखना कभी तलवार देखनाll

परिचय-डॉ.नसीमा निशा की जन्म तारीख १ सितम्बर तथा जन्म स्थान-कैमूर(बिहार) हैl वर्तमान में आप स्थाई रूप से वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में रहती हैंl भाषा ज्ञान-हिंदी और उर्दू हैl उत्तर प्रदेश की वासी डॉ. निशा ने पीएच.डी.(हिंदी)की है,तो  कार्यक्षेत्र-अभिकर्ता और शिक्षक (बीमा निगम व अध्यापन)का हैl इनकी लेखन विधा-ग़ज़ल हैl अपने राज्य सहित अन्य के भी कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं और समीक्षा प्रकाशित हुई हैंl अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा लेखन के लिए आपका सम्मान किया गया हैl विशेष उपलब्धि-दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से समय-समय पर काव्य पाठ का प्रसारण, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरों में शिरकत हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक सदभावना व अदब की इबादत करना हैl डॉ.नसीमा निशा के लिए प्रेरणा पुंज-सभी वरिष्ठ रचनाकार हैंl

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