आत्मशांति

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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मोहल्ले में गोलमोलचंद जी के यहाँ सात दिवसीय पाठ रखा,सभी आसपास के निवासी भी इस पाठ में आमंत्रित किए गए। इस दौरान कथा, पूजन,यज्ञ,आरती और भजन ने सात दिन पूरे मोहल्ले को भक्ति-भाव में डुबाए रखा। अंतिम दिन पूरे मोहल्ले के लिए प्रसादी (भंडारा)भी आयोजित की गई। सभी ने खूब श्रद्धा और चटखारे के साथ खीर,हलवा,पुरी और भजिए का आनंद लिया। भोजन प्रसादी के दौरान एक सज्जन ने गोलमोलचंद जी से इस आयोजन का कारण पूछ लिया….गोलमोलचंदजी ने भी बड़ी सहजता और उदारता से बताया कि…उन्होंने,पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण की कामना हेतु यह आयोजन किया।
बाहर के लोगों ने कार्यक्रम की खूब सराहना की और इस भक्तिपाठ को सार्थक बताया,वहीं आसपास के लोग यह जानकर हतप्रभ रह गए,क्योंकि, पड़ोसी जानते थे कि,जब तक- गोलमोलचंद जी की माता जी जीवित थी,तब तक अक्सर भोजन और चाय के लिए तरसती थी। आसपास के लोगों से दवा की गुहार लगाती रहती, आज उन्हीं माताजी की आत्म शांति हेतु भोज,यज्ञ और पूजन किया गया।  लोगों ने स्वादिष्ट भजनों का आनंद लिया,डकार और जम्हाई लेते हुए अपने घरों की ओर प्रस्थान किया।
परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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