आत्मा

पवन गौतम ‘बमूलिया’
बाराँ (राजस्थान)
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(धुन-तुम्हारी नजरों में हमने देखा…)

अन्तस में जाकर जब हमने देखा,
आभा ज्योति चमक रही थी।
वहीं ईंगला वहीं पिंगला,
और सुृुृषुम्ना दमक रही थी॥

अन्तस में जाकर जब हमने देखा,
आभा ज्योति चमक रही थी॥

मूलाधार से शून्य चक्र तक,
हमने देखा अजब नजारा।
कहीं बीच में परम शांति,
कहीं स्नेह स्पर्शन प्यारा॥

वहीं अष्ट गंधन वितरंगे,
वहीं दिव्यता महक रही थी।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा,
आभा ज्योति चमक रही थी॥

कभी ध्यान में कभी समाधि,
प्राणों के आयामों को किया था।
प्रथम इन्द्रियों को मन में भेजा,
वहीं आतम रूठा पिया था॥@

तभी हृदय के समीप देखा,
प्रिय आत्मा रमक रही थी।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा,
आभा ज्योति चमक रही थी॥

गहरे समन्दर में गोते खाये,
अजब अनोखा था आत्म दर्शन।
मन प्राणों का एक होना,
आत्मा का विश्वात्मा समर्पण॥

हीरे-मोती रत्नेश मानक,
सभी मणियाँ खनक रही थी।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा,
दिव्य आभा चमक रही थी॥

परिचय –पवन कुमार गौतम का साहित्यिक उपनाम-बमूलिया है। जन्म तारीख ३ जुलाई १९७५ एवं जन्म स्थान-बमूलिया कलाँ जिला बाराँ (राजस्थान)है। वर्तमान में बमूलिया कलाँ तहसील अन्ता जिला बाराँ में ही निवास है। स्थाई पता भी यही है। शिक्षा स्नातकोत्तर (अंग्रेजी, हिंदी, राजस्थानी साहित्य, संस्कृत साहित्य,दर्शन शास्त्र,समाज शास्त्र और राजनीति विज्ञान)एवं शिक्षा स्नातक (बी.एड.)है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। श्री गौतम सामाजिक कार्य के अन्तर्गत  समयानुसार यथासक्ति कार्यों में मदद करते हैं। इनकी लेखन विधा-कविता, गीत, छन्द, मुक्तक, रूबाई, ग़ज़ल, सजल, गीतिका,नज़्म तथा कव्वाली है। ओज रस की कविताओं का काव्य संकलन प्रकाशाधीन है,तो अनेक पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। आपको विद्यालय एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों सहित कोटा शैक्षणिक मंच तथा साहित्यिक मंचों से भी सम्मानित किया गया है। विशेष उपलब्धि में संगीत- गायन विधा में पारंगत होना है। आप वैदिक संस्कृत,पांडित्य एवं ज्योतिष में अध्ययनरत हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-स्वान्त सुखाय एवं परम चेतना की अनुभूति के साथ ही प्रकृति के साथ सामन्जस्य स्धापित करना व मानवीय मूल्यों के महत्व का प्रतिपादन है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता श्रीमती शांति बाई गौतम और पिता बृजमोहन गौतम सहित विष्णु विश्वास दाधीच(कवि-गीतकार), साहित्यिक गुरू स्व. गिरिधारीलाल मालव (हाड़ौती के प्रेमचन्द) एवं धर्म पत्नी सुनीता पंचोली है। इनकी विशेषज्ञता आशु काव्य वाचन व लेखन में है। 

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