आदमी

पुष्पा अवस्थी ‘स्वाति’ 
मुंम्बई(महाराष्ट्र)

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डालो जिधर निगाह,है मजबूर आदमी।
दर-दर भटक रहा है,मजदूर आदमी।

है बेबसी निगाह में,रोज़गार की लिए,
अब तक बना हुआ है, गफूर आदमी।

सड़कों पे बोझ ढोता है,दिन ढले तलक,
फुटपाथ पे सोता है,थक के चूर आदमी।

खुशियों की ख़्वाहिशों में,खोया हुआ है यूँ,
के उम्र से पहले हुआ,बेनूर आदमी।

तलाश-ए-रोटी में रहा,है घूम गोल-गोल,
दुनिया से हुआ गोल,बदस्तूर आदमी॥

परिचय–पुष्पा अवस्थी का उपनाम-स्वाति है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी साहित्य रत्न)है। जन्म स्थान-कानपुर है। आपका कार्यक्षेत्र स्वयं का  व्यवसाय(स्वास्थ्य सम्बंधी)है। वर्तमान में पुष्पा अवस्थी मुंम्बई स्थित कांदिवली(वेस्ट)में बसी हुई हैं। इनकी उपलब्धि बीमा क्षेत्र में लगातार तीन साल विजेता रहना है। प्रकाशित पुस्तकों में-भूली बिसरी यादें(ग़ज़ल-गीत कविता संग्रह)एवं तपती दोपहर के साए (ग़ज़ल संग्रह)है।

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