आप बीती-जग बीती

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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शीश महल की बात पुरानी,
रजवाड़ी किस्से अनजाने।
हम भी शहंशाह हैं,बंधु,
शीश पटल के दीवानेll 

आभासी रिश्तों के कायल,
कविताई के मस्ताने।
कर्म विमुख साधु-सा जीवन,
और व्याकरणी हैं पैमानेll 

कुछ तो नभमंडल जैसे तारे,
कुछ मुझ जैसे घसियारे।
काम छोड़ कविताई करते,
दुखी भये सबके घरवारेll 

संचालक मंडल में रहूँ तो,
जाने-माने वारे-न्यारे।
मुखिया बनूं शक्तिमान सम,
जिसको चाहें तारे चाहें मारेll 

मैं भी शीश पटल सत संगी,
तुम भी मेरे साथ सयाने।
पंखहीन बिन दीपक जलते,
हम तो बिन मौसम परवानेll 

सुप्रभात से शुभ रात्रि तक,
शीश पटल पर टिका रहता हूँ।
घरवाली दिन-रैना मारे ताने,
जाने बिन जाने सहता हूँll 

नदिया,में बुंदिया की जैसे,
स्वप्नलोक में बहता हूँ।
मनोभाव ऐसे रहते ज्यों,
शीश महल में हीे रहता हूँll 

इसी पटल पर भी रह लेता,
अन्य पटल भी मंडराता हूँ।
संदेशे पढ़-पढ़कर मैं,तो,
भँवरे-सा नित भरमाता हूँll 

चैन पटल बिन नहीं मिलता,
और पटलों पर बेचैन हूँ।
नैन पटल में क्या-क्या खोजे,
लागे घर में बिना नैन हूँll 

कैसे,अनुपम रिश्ते जोड़े,
सब आभासी प्रतिबिंबों से।
धरा धरातल भूल रहें,हम,
दूर हो रहे सत बिम्बों सेll 

जीवन ही आभास मात्र अब,
शीश पटल के आचरणों में।
जैसे शहंशाह रमते थे,
शीश महल के सत वरणों मेंll 

मूलभूत,अन्तर पहचाना,
कैसा,हुआ परिहास है।
वो,तो शीश महल के स्वामी,
हम,शीश पटल सन दास हैंll 

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl

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