`आय लव यू` का परिणाम

शैलश्री आलूर ‘श्लेषा’ 
बेंगलूरु (कर्नाटक राज्य)
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        शीर्षक से संबंधित जो विषय कहने जा रही हूं,यूं तो वह एक छोटी- सी घटना है,पर उसका परिणाम  बच्चों पर क्या होता है,यह बड़ों को सोचने के लिए मजबूर कर देती है। 
               बच्चों को आचार-विचार,संस्कृति सिखाना परिवार में रहे माता-पिता और बड़ों का काम है। बच्चों की जिज्ञासा को पूर्ण करने के लिए उनका हर एक सवाल का सटीक विवरण देनी पड़ता है,पर कभी- कभी बच्चे ऐसे प्रश्न पूछते हैं कि,उत्तर देने में बड़ों को आसानी नहीं होती है। 
यह बहुत सालों पहले घटी एक घटना है,जब हम सभी ६ बच्चे प्राथमिक कक्षा में पढ़ रहे थेl मां की छोटी बहन यानी मासी महाराष्ट्र में रहने के कारण अपने एक बेटे और एक बेटी को भी मां के पास ही शिक्षा पाने के लिए छोड़ गई,क्योंकि महाराष्ट्र की भाषा मराठी होने के कारण वह बच्चों को कर्नाटक की मातृभाषा कन्नड़ शिक्षा सिखाना चाहती थी। मेरे पापा भी करुणा की मूर्ति थे,जिन्होंने अपने ६ बच्चों के साथ मासी के २ बच्चों को भी पढ़ाने की जिम्मेदारी ले ली,यानी पढ़ाने लगे।
                 छठी कक्षा तक मराठी पढ़कर अब जाकर वह कन्नड़  माध्यम सीखना चाहती थी,जो उसके लिए बहुत कठिन था। मासी का बेटा तो के.जी. से ही हमारे यहाँ था। हां,मौसी की बेटी का नाम विद्या हैl  
 विद्या को कन्नड़ माध्यम में जाते ही शाला में कुछ समझ में नहीं आ रहा था। तब जमाना इतना आगे बढ़ा भी न था कि टी.वी. और मोबाइल से भाषा सीख ले। घरों में टी.वी. तब आ ही रहे थे। हमारे घर में भी टी.वी. आई तो सबके साथ विद्या भी खुश होकर नाची थी। तब घर-घर में पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं थी हमारे शहर में। घर में नल तो था,पर वह पानी पीने के लिए अच्छा न होने के कारण सब सार्वजनिक नल जो घर से दस फुट दूर था,वहां जाकर पानी भरकर लाते थे।
              हमारी गली वाले पीने का पानी यहीं से ले जाते थे,इसलिए हर समय वहां पर पानी के लिए झगड़े होना सामान्य था,पर मेरी मां बहुत कोमल स्वभाव की है। किसी से भी लड़े बिना वह पानी मिलता तो ले आती। नल बंद होने के बाद खाली घड़े घर ले आती। शाम को ड्यूटी से आकर पिताजी कहीं दूर जाकर पानी लाते थे।
            एक बार अचानक मम्मी-पापा को सुबह ही गांव जाना पड़ा। रविवार होने के कारण सब बच्चे घर में ही थे तो निश्चिंतता से दोनों गए। वे शाम को लौटने वाले थे। उस दिन भैया आराम से बैठकर टीवी देख रहे थे। विद्या और मैं भैया के पास बैठे थे,जिसके एक चैनल में अभिनेता ने अभिनेत्री को `आय लव यू` कह दिया। विद्या सभी भाषाओं को सीखने की इच्छुक थी। उसने झट से भाई से पूछ लिया कि `आय लव यू` का मतलब क्या है। कालेज में पढ़ते भैया को इस प्रश्न ने दुविधा में डाल दिया,क्योंकि उस लड़की को प्यार के बारे में बताना भैया को अच्छा नहीं लग रहा था। भैया ने विद्या को डांटा कि चुप बैठकर टी.वी. देख,पर विद्या रोने लगीl वह बार-बार उसका मतलब पूछने लगी तो भैया ने तंग आकर कह दिया कि,`आय लव यू` एक गाली है, एक निंदा करनेवाला,डांटने वाला शब्द है। इससे विद्या को तसल्ली हो गई।
तभी हमारी पड़ोसन ने आकर बताया कि,तुम्हारी बारी आई है पानी भरने की,जाकर घड़ा भर लो। काम करने की शौकीन विद्या झट से पानी भरने चली गई। तब तक एक लड़का हमारे लगाए हुए घड़े को बाजू रखकर अपना घड़ा भरने लगा था। विद्या ने कहा कि,पानी भरने की मेरी बारी है,छोड़ दो। उस लड़के ने विद्या की बात न मानते घड़ा न निकाला तो विद्या उसके साथ झगड़ने लगी। वह उसे गाली देते हुए बोली-`अबे गधे कहीं के,आय लव यू। तू घड़ा निकालता है या पूरा पानी गटर में बहा दूं। आय लव यू रे बंदर,तू छोड़ मुझे पानी भरने के लिए, वरना देख बे,आय लव यू। क्या करेगा तू ?` वह बार-बार आय लव यू कि रट लगाते हुए उसे डांट रही थी। लड़का अब घबरा गया कि,यह लड़की आय लव यू भी बोल रही है,और डांट भी रही है। अरे ये क्या कर रही है!! वह अपनी टुकुर-टुकुर आँखों से विद्या को ही देख रहा था,और घड़ा भरकर पानी गटर में बह रहा था,पर विद्या ने बार-बार आय लव यू के नाम से डांटना बंद नहीं किया। तब तक बहुत लोग जमा हो गए थे। सब विद्या की बातें सुनकर हँस रहे थे। फिर किसी ने जाकर भैया को बता दिया कि तुम्हारी बहन किसी से झगड़ा कर रही है। भैया भागकर नल के पास गए। तब तक विद्या उस लड़के का कॉलर पकड़कर `आय लव यू कुत्ते` बोल रही थी। लड़का शायद सीधा था जो वापस विद्या को मारे बिना उसी से मार खा रहा था। भैया ने भागकर लड़के को विद्या से छुड़ाया और मुश्किल से घर आए। बाकी घड़ों को भरकर मैं घर आई। बाद में भैया ने विद्या को समझाया कि आय लव यू का मतलब  `मैं तुमसे प्यार करता हूँ` होता है। तब विद्या अपमानित महसूस करके जोर से रोने लगी। उसे अपने किए पर अब पछतावा हो रहा था। इसके बाद वह लड़का,जिसने इससे मार खाई थी, किराए का कमरा बदलकर चला गया। विद्या भी दसवीं तक शिक्षा पूर्ण करके महाराष्ट्र चली गई। आज विद्या बड़ी हो गई है,तीन बच्चों की मां है,पर आज भी वह जब हमारे यहाँ आती है,सभी `आय लव यू` कहकर ही उसे चिढ़ाते हैं,तो वह शर्म से लाल होकर हंसने लगती है। 
      यह किस्सा तो छोटा है,मगर शब्दों का असर बच्चों पर किस तरह होता है,यही समझाने के लिए मैंने लिखा। इसलिए,बच्चों को कुछ भी बोलने से पहले सोच-समझकर उत्तर देना ही बेहतर है। वरना `आय लव यू` जैसा ही होगा। 
(विशेष-शीर्षक में ही मूल कथ्य होने से अंग्रेजी का अपरिहार्य उपयोग किया गया हैl )
परिचय-शैलश्री आलूर का साहित्यिक उपनाम-श्लेषा हैl आपकी जन्मतिथि २ सितंबर तथा जन्म स्थान-बादामी हैl वर्तमान में आप देवीनगर(बेंगलूरु)में निवासरत हैं,और यही स्थाई पता भी हैl कर्नाटक राज्य की निवासी शैलश्री आलूर ने एम.ए. और बी.एड. सहित एम.फिल. तथा पी.एच-डी की शिक्षा भी हासिल की है। आपका कार्य क्षेत्र-प्रौढ़ शाला में हिंदी भाषा शिक्षिका का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप अनेक कवि सम्मेलनों में भागीदारी करके सम्मानित हो चुकी हैं। आपकी लेखन विधा-तुकांत-अतुकांत,हाईकु,वर्ण पिरामिड,कहानी, लघुकथा,नाटक,संस्मरण,लेखन,रिपोर्ताज और गीत आदि है। आनलाइन स्पर्धा में आपको महादेवी वर्मा सम्मान(संस्मरण के लिए),प्रताप नारायण मिश्र सम्मान सहित खुर्रतुल-ए-हैदर सम्मान,मुन्शी प्रेमचंद सम्मान भी मिला हैl आप ब्लॉग पर भी कविताएं लिखती हैं। विशेष उपलब्धि एक मंच द्वारा `श्लेषा`,दूसरे मंच द्वारा `लता` उपनाम अलंकरण तथा `श्रेष्ठ समीक्षक` सम्मान मिलना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-मन की भावनाओं को कलम का रूप देना,साहित्य के जरिए समाज में प्रगति लाने की कोशिश करना और समाज में व्याप्त समस्याओं को बिंबित करके उनका हल करना हैl

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