आरक्षण और सत्ता का संरक्षण

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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कमजोर को सहारा और पिछड़ों को आगे लाना यह बेशक काम होता है व्यवस्था का,पर सेवा में स्वार्थ ये तो मानवीय स्वभाव होता है। आज हम फिर से यही देख रहे हैं। संसद और सरकार के आखरी सत्र में मोदी सरकार ने सवर्णों को आरक्षण का ऐलान करके बड़ा दांव चल दिया है। साल २०१९ की पहली कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए मोदी सरकार पिछड़े सवर्णों के लिए १० फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए संविधान में संशोधन की तैयारी कर ली गई है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आरक्षण के दायरे में कौन आएगा और कौन नहीं। पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के लिए सरकार ने कुछ पैमाने बनाए हैं। आरक्षण सिर्फ उन्हीं सवर्णों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय ८ लाख रुपये से कम होगी.इसके अलावा आरक्षण के हकदार वे ही रहेंगे जिनके पास पांच एकड़ से कम जमीन होगी। ईडब्ल्यू एस श्रेणी भी स्पष्ट कर दी गई है। यानी आरक्षण का फायदा किसे मिलेगा,इसका भी निर्धारण कर दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि आरक्षण आम जनता का नहीं,सत्त्ता का है। और अभी तो यह भी स्पष्ट नहीं हो रहा है। फैसला कितना जमीनी होगा,यह तभी स्पष्ट होगा जब सविधान संशोधन और सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन एवं सदन में बहुमत का रास्ता साफ होगा….नहीं तो आरक्षण…सत्ता का स्वरक्षण मात्र रह जाएगा।
परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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