आरी न चलाओ तुम

डी.पी. लहरे
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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पर्यावरण दिवस विशेष…………………………………..
जान होती है पेड़-पौधों में भी,
इनमें कुल्हाड़ी न चलाओ तुम।
आक्सीजन पेड़-पौधों से मिलती है,
पेड़-पौधों में आरी न चलाओ तुम॥

वन ही जीवन है सब प्राणी का,
धरा की गोद में पौधा एक लगाओ तुम।
बरसता है बादल पेड़ों के आकर्षण से,
खाली जगह को पेड़ों से सजाओ तुम॥

कारखानों की चिमनियों में धुआँ,
चिमनियों को ऊँचा लगाओ तुम।
बहती थी नदिया अब सूख रही है,
नदियों में कचरा न बहाओ तुम॥

प्लास्टिक धुआँ जहरीला होता है,
इन्हें खुली जगह में न जलाओ तुम।
प्रकृति से न खिलवाड़ करना,
जंगल में न आग लगाओ तुम॥

पर्यावरण शुद्ध है तो जीवन शुद्ध है,
प्रकृति को न नुकसान पहुँचाओ तुम।
जीव-जन्तुओं की तभी भलाई है,
स्वच्छ पर्यावरण को बनाओ तुम॥

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