आर्य भूमि भारत…

प्रदीपमणि तिवारी `ध्रुव भोपाली`
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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हे आर्य भूमि भारत वसुन्धरा कोटि नमन तुमको,
जहाँ उपजते रणबाँकुरे न्याय मिले सबको।
 
तपोभूमि ऋषियों की भारत जाने सकल भुवन,
जहाँ उपजते माणिक हीरा स्वर्ण मिले हमको।
 
यवन अनेक यहाँ आये,नहीं हिला सके तृण को,
विजय मिले इस हेतु बनाया मीत भी छल-बल को।
 
क्षमा दया का दान दिया पर भूल हुई हम से,
छुरा घोंप कर पीठ सताया सबमें निर्बल को।
 
रौद्र रूप है बता दिया हमने सारे जग को,
परशुराम के अवतारी हम,ज्ञात हुआ सबको।
 
मचा युद्ध तांडव जब भी आश्चर्य हुआ नभ को,
धर्म कार्य रक्षार्थ जन्म लेना है पड़ा रब कोll 
परिचय–प्रदीपमणि तिवारी का लेखन में उपनाम `ध्रुव भोपाली` हैl आपका कर्मस्थल और निवास भोपाल (मध्यप्रदेश)हैl आजीविका के लिए आप भोपाल स्थित मंत्रालय में सहायक के रुप में कार्यरत हैंl लेखन में सब रस के कवि-शायर-लेखक होकर हास्य व व्यंग्य पर कलम अधिक चलाते हैंl इनकी ४ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैंl गत वर्षों में आपने अनेक अंतर्राज्यीय साहित्यिक यात्राएँ की हैं। म.प्र.व अन्य राज्य की संस्थाओं द्वारा आपको अनेक मानद सम्मान दिए जा चुके हैं। बाल साहित्यकार एवं साहित्य के क्षेत्र में चर्चित तथा आकाशवाणी व दूरदर्शन केन्द्र भोपाल से अनुबंधित कलाकार श्री तिवारी गत १२ वर्ष से एक साहित्यिक संस्था का संचालन कर रहे हैं। आप पत्र-पत्रिका के संपादन में रत होकर प्रखर मंच संचालक भी हैं।

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