इंतजार

रचना सिंह ‘रश्मि’
आगरा(उत्तरप्रदेश)
************************************************************

राह देखता,
हर दिन ताकता
आएगा वह।

पुकारेगा वो,
लग के गले मुझे
कहेगा पापा।

 

हाथ पकड़,
घर ले जाएगा
माफी मांगेगा।

 

दो बेटों में से,
कोई लेने आएगा
घर जाऊंगा।

 

कंधों को मेरे,
सहारा दे के फर्ज
को निभाएगा।

 

मैं निराशा से,
सांझ को खो जाता हूँ
दर्द सताता।

 

सब दे डाला,
हर इच्छा को मारा
कौन हमारा।

 

इससे अच्छा,
पिता ना कहलाता
दु:ख ना पाता।

 

गैरों में जीता,
उम्मीद ना लगाता
मुक्ति मैं पाता।

Hits: 19

आपकी प्रतिक्रिया दें.