इज्जत बचाने वाले ही गुनहगार क्यों ?

संजयसिंह राजपूत
दादर(उत्तर प्रदेश)

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राजेश गर्मी से बहुत परेशान है,वह शहर में रहता है। पिछले महीने वह गांव घूमने के लिए आया है। उसे गांव के लोगों,संस्कृति,सभ्यता,एकता से बहुत प्यार है। इसी कारण हर दो वर्ष में गांव घूमने आया करता है। गांव में रोहित उसका बहुत करीबी दोस्त है। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख बताते हैं। राजेश गांव के बीच में बसे दलित वर्ग की एक झोपड़ी में बैठकर कुछ सोच रहा था। दो दिन से रोहित कहीं रिश्तेदारी में गया हुआ था। आज वह वापस आने वाला है,राजेश उसी का इंतजार कर रहा था। थोड़ी देर बाद रोहित आ गया। रोहित अपनी यात्रा के बारे में बता रहा था,लेकिन राजेश का ध्यान कहीं और था। इसका आभास होते ही रोहित ने पूछा-क्या हुआ भाई,तुम इतने उदास क्यों हो ? मैं तब से बोले जा रहा हूं,और तुम हो कि ध्यान ही नहीं दे रहे हो। कुछ तो बताओ। क्या किसी ने तुम्हें कुछ बोला या झगड़ा किया। राजेश ने कहा-नहीं भाई,ऐसी कोई बात नहीं है। कल मैंने कुछ देखा जो मुझे पसंद नहीं आया। वही सोच रहा हूं। आमतौर पर शहरों में किसी को किसी से कोई मतलब नहीं रहता है। इसलिए वहां कुछ देखकर भी लोग नहीं कहते हैं,लेकिन अपना गांव तो शहर नहीं है। इसलिए,मैं चाहता हूं कि मैं राजेंद्र चाचा को जाकर बताऊं। वे हमारी जाति के हैं। अगर कहीं उनकी बदनामी होगी तो हमारी पूरी जाति की बदनामी होगी। यह सुनते ही रोहित को इस विषय को जानने की जिज्ञासा और तेज हो गई। उसने पूछा-क्या कहना चाहते हो तुम राजेंद्र चाचा से ?
राजेश ने बताना शुरू किया। उसने कहा-राजेंद्र चाचा की लड़की `अनु` को कल मैंने रमुआ गोंड के लड़के संतोष से बात करते देखा था। कई दिनों से देख रहा हूं,वह कभी उसका फोन ले लेती है तो कभी छत से उसको कुछ इशारा करती रहती है। कल रात को कोई आठ बजे होंगे, मैंने देखा,वह राजेंद्र चाचा की छत पर जो अंधेरे वाला कमरा है,वहीं पर अंधेरे में खड़ा था। जब मैं बोला,तो थोड़ी देर बाद वह नीचे आकर मुझसे मिला। उसकी बातों में धोखे की बू आ रही थी,जबकि अभी कुछ ही दिन पहले रमूआ और शिव गुप्ता में झगड़ा हुआ था। तुमने भी देखा गांव में सबसे पहले व्यक्ति थे राजेंद्र चाचा जो रमूआ की तरफ़ से सच बात बोले थे, लेकिन रमूआ का लड़का उस महत्ता को दरकिनार कर उन्हीं की इज्जत पर दाग लगाने पर तुला हुआ है। इसलिए मैं चाहता हूं कि आज यह बात चाचा से कह दूं। शायद वे अपनी लड़की को समझा लें,जिससे उनकी और लड़की की बदनामी भी नहीं होगी। वरना उनके साथ-साथ हम सभी लोगों को भी उनके सामने नीच बनकर रहना पड़ेगा। यह सुनते ही रोहित तपाक से बोला-नहीं राजेश,तुम ऐसा कुछ भी  बिल्कुल नहीं करोगे। राजेश ने आश्चर्य से पूछा-लेकिन तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ! क्या तुम इसके बारे में पहले से जानते हो। नहीं,मैं इसके बारे में तो नहीं जानता-रोहित ने कहा। राजेश ने कहा-फिर तुम मुझे मना क्यों कर रहे हो ?
यह सब तो ठीक नहीं है। अब रोहित ने रोने-सा मुंह लटका लिया। कहने लगा-यार राजेश,तुम तो जानते ही हो मुझे। मैं ग़लत बातें बर्दाश्त नहीं करता,लेकिन कुछ महीने पहले मैं आजाद चाचा के लड़के संदीप के बारे में बात करने के लिए उनके घर गया था। मैंने सोचा,संदीप मुझसे छोटा है। अगर वह कुछ ग़लत कर रहा है तो मुझे उसके परिवारवालों को बताना चाहिए। जब मैं उसके घर पहुंचा और चाचा जी से कहना शुरू किया कि,वह आजकल मदिरा, जुआ,लड़कियों को छेड़ रहा है,तो चाची आ गई और उल्टा मुझे ही गालियां सुनने तथा थप्पड़ खाने पड़े। वह भी तब,जब संदीप घर पर ही था। उसके सामने मिली फटकार को तो मैंने सहन कर लिया,लेकिन जब उसने चिढ़ाना शुरू किया,तब मैं बहुत रोया था। इसलिए,मैं चाहता हूं कि तुम्हारे साथ भी यही न दोहराया जाए। राजेश ने आश्चर्य से पूछा-लेकिन,इन लोगों ने ऐसा किया क्यों,तुम तो उनकी भलाई के लिए ही कहने गए थे। तब रोहित ने बताया कि शायद उन्हें ऐसा लगता है कि हमने उनके लड़के को बदनाम करने की कोशिश की।
इसलिए,गांव में बहुत कुछ हो रहा है,लेकिन कोई किसी के बारे में किसी से नहीं कहता है। आज समाज में असंवेदनशीलता के बढ़ने का यह भी एक मुख्य कारण है। राजेश बोला- लेकिन,इससे तो लड़के-लड़कियों की आदत और खराब हो जाएगी। यह गांव तो शहरों को भी पछाड़ने लगा है। नैतिकता का गला घोंटा जा रहा है,जो आने वाले दिनों में हमारे गांव-समाज के लिए ठीक नहीं है। यह तो तुम सही कह रहे हो राजेश,लेकिन हम लोग कर भी क्या सकते हैं। जब उनके घरवाले उल्टा हम पर ही बरस पड़ते हैं।
इसीलिए,मैं चाहता हूं कि तुम भी यह बात किसी से मत कहना। उनको छोड़ दो,आज नहीं तो कल जब सभी लोग जान जाएंगें। जब चाचा-चाची और हमारे जाति के लोगों की इज्जत का फालूदा बन जाएगा,तब शायद ये लोग खुद-ब-खुद सोचेंगे और पछताएंगें। राजेश ने कहा- शायद तुम सही कह रहे हो। इसीलिए,छोटे-छोटे लड़के-लड़कियों का मन बढ़ता चला जा रहा है। नशा,चोरी,बलात्कार,लेकर भाग जाना आदि विकृतियां समाज में तेजी से बढ़ रही हैंl जो इनके गुनाहों को सुधारने की कोशिश करता है,उसे ही उनके घरवाले गुनहगार साबित करने लगे हैं। अब मैं भी नहीं जाऊंगा कहने,करने दो जो जैसा करेगा उसके सामने फल आएगा। रोहित ने बात को खत्म करने के लिए कहा-चलो छोड़ो यह सब बातें,चलो हम लोग बाजार चलते हैंl कुछ खा-पीकर घूमते हुए आएंगें। अब राजेश,दिमाग पर थोड़ा हल्कापन महसूस कर रहा था। फिर दोनों मित्र बाजार चले गएl  

परिचय: संजयसिंह राजपूत की जन्मतिथि-१० जून १९९० और जन्म स्थान-दादर है। आप वर्तमान में ग्राम-दादर(तहसील-सिकंदरपुर,बलिया)में ही बसे हुए हैं। उत्तर प्रदेश से नाता रखने वाले श्री सिंह की शिक्षा-एम.ए. (हिंदी) है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक होने के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में महावीर धाम सोसायटी(दादर)से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा में कविता,लेख और कहानी लिखते हैं। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय श्री राजपूत के लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बदलाव लाना है। 

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