इज्जत

 

निशा सतीशचन्द्र मिश्रा `यामिनी`

मुंबई(महाराष्ट्र)

************************************************

`आज इस शरीर की पीड़ा सही नहीं जा रही है। पता नहीं, क्यूं उठा नहीं जा रहा है ?` रमा ने अपनी बड़ी जेठानी से कहा-उसकी आवाज उसके दर्द को बयान कर रही थीl

`क्यूं क्या हुआ ?` जेठानी ने धीमे स्वर में पूछा।

`दीदी अगर किसी स्त्री की इज्जत लूट ली जाती है,तो वह समाज में अपराधी दिखाई देता है,लेकिन दीदी मेरा क्या ? जब अशोक शराब के नशे में धुत कमरे में आता है आैर कई बार मेरी इजाजत बिना रात में मुझे तार-तार करता है।तो क्या,यह अपराध नहीं है ?
इसकी शिकायत अम्मा से की तो अम्मा कहती है-`पति को खुश रखना तुम्हारा धर्म है।`
क्या ? मेरी आत्मा की इज्जत जाते नहीं दिखाई देती। इन्कार करने पर जब वह मुझ पर प्रहार करता है तो वह क्या ! सुनाई नहीं देता।`
`दीदी फर्क इतना है,एक स्त्री बंद कमरे में दरिंदगी सहती और एक स्त्री इस बनावटी समाज में।`
यह सब सुन रमा की जेठानी अपने आंसू पोछते हुए उसे अपने पैरों पर लिटाकर मौन थी कि,न जाने ऐसी कितनी रमा और भी होगी। वैसे भी इस समाज में हम केवल भोग्य की वस्तु ही बनकर रह गई हैंl हम क्या सोचती हैं,क्या चाहती हैं ? कभी किसी ने पूछा ही नहींl कभी कोई पूछे तो बताया जाए और यही सब सोच में थी रमा की जेठानी…..।

परिचय-निशा सतीशचन्द्र मिश्रा का साहित्यक उपनाम `यामिनी` है। आपकी जन्मतिथि२५ फरवरी १९८५ और स्थान उत्तरप्रदेश है। स्थाई और वर्तमान पता पंतनगर, घाटकोपर(ईस्ट)मुंबई है। महाराष्ट्र राज्य के शहर मुंबई की निवासी निशा मिश्रा की शिक्षा- एम.ए.,बी.एड एवं पी.एच-डी. है। पेशे से आप निजी महाविद्यालय में प्राध्यापिका हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और दोहा है। प्रकाशन में ऑनलाइन औरइलाहाबाद के पत्रों में भी रचनाओं को स्थान मिला है। प्राप्त सम्मान में प्रमुख तौर पर ममता कालिया के उपन्यास ‘बेघर’ की समीक्षा पर द्वितीय पुरस्कार २०१८ सहित अच्छे शिक्षक का सम्मान २०१७,मृदुला गर्ग के उपन्यासों की चर्चा पर प्रथम पुरस्कार २०१७ मिला है। यामिनी सामाजिक मीडिया पर भी लिखती हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-अपनी भावनाओं को लोगों तक विस्तारित करना और हिंदी भाषा की सेवा करना है।

Hits: 133

आपकी प्रतिक्रिया दें.