इन्तेख़्वाब

ओमप्रकाश बिन्जवे `राजसागर`
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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वो खुद चले आते हैं,हम बुलाने नहीं जाते।
क्या करुँ,होंठों से प्यार के तराने नहीं जाते।

किसको ठुकराये,किसका इन्तेख्वाब करे,
दोस्त,पहली निगाह में पहचाने नहीं जाते।

तुम्हें जरुरत है,तुम्हें ही हाथ बढ़ाना होगा,
जाम,खुद किसी की प्यास बुझाने नहीं जाते।

करते हैं बड़े-बड़े वादे,मसीहा बने बैठे,
वो किसी अर्थी को काँन्धा लगाने नहीं जाते।

काश तुम्हें भी पता होता,क्या मजा है दर्द में,
बहारों से,फूलों की बख्शीश पाने नहीं जाते।

हम भी चाहते हैं,उनको दीवानों की तरह,
हम औरों की तरह,प्यार जताने नहीं जातेll

परिचय-ओमप्रकाश बिन्जवे का साहित्यिक नाम `राजसागर` हैl आप पश्चिम मध्य रेल में स्टेशन प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैंl जन्म स्थल-ग्राम पाढर जिला बैतूल (म.प्र.)हैl शिक्षा-एम.ए.(अर्थशास्त्र)हैl इनका वर्तमान निवास होशंगाबाद रोड (भोपाल,मध्यप्रदेश) पर हैl आपकी रूचि-लेखन,फिल्म निर्माण, पर्यटन तथा संगीत में हैl आपका लक्ष्य-फिल्म निर्माण,संगीत स्टूडियो और पुस्तक प्रकाशन का हैl श्री बिन्जवे की उपलब्धि एक पत्रिका में सम्पादक (भोपाल) सहित पत्रकारिता करना एवं प्रकाशित पुस्तकें-खिड़कियाँ बन्द है(ग़ज़ल संग्रह),चलती का नाम गाड़ी (उपन्यास) और बेशरमाई तेरा आसरा(व्यंग्य संग्रह) हैl हिंदी को आगे बढ़ाना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है। कार्यालय में हिंदी में कार्य करने के लिए आपको सम्मानित किया जा चुका है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी श्री बिन्जवे की रचनाएं कई पत्रों में छपी हैंl आपको काव्य क्षेत्र में आपको अखबारों सहित केन्द्रीय संस्कृति मंत्री के कर कमलों से `काव्य रश्मि`सम्मान(दिल्ली) से नवाजा जा चुका है। साथ ही संकलन का विमोचन भी मंत्री द्वारा किया गया थाl 

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