इश्क हुआ पहला-पहला

अलका जैन
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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कुहू-कुहू बोले रे काली कोयल बोले कुहू,
बावरी हुई काली कोयल बंजारे-सी डोलेl

इश्क हुआ पहला-पहला अम्बर से बोले,
काला रंग बिसार सखी गुण निखार लाईl

कौन गुरु की चेली काली कोयल बोलो,
रियाज कहाँ-कब करे निगोड़ी कोयल बोलोl

इश्क की बोली होती अनमोल सखी सुन,
जो बोले वहीं पंडित हौले-हौले-हौले सखीl

इश्क मधुर धुन सुन सखी खट्टी अमिया,
मधुर मीठी हो गई कमाल इश्क का देखोl

बिदाई के समय बोले रे कोयल सुनो भाई,
अगले बरस फिर आएगी खट्टी अमियाl

मधुर मीठी कर जाएगी अर्जी सुनो मेरी,
मेरे आम के पेड़ों को संरक्षण देते रहनाl

इन पेड़ों पर हम पक्षियों का रैन-बसेरा,
कुहू-कुहू बोले रे काली-काली कोयलll

परिचय-अलका जैन का निवास इंदौर(मध्यप्रदेश) में हैl इनकी जन्म तिथि ८ अक्तूबर १९५७ और जन्म स्थान धार(मप्र) हैl स्थाई रूप से शहर इंदौर में सी बसी हुई अलका जैन का कार्यक्षेत्र भी इंदौर ही हैl आप सामाजिक गतिविधियों के अन्तरगत विधवा विवाह करवाने,हास्य-कवि सम्मेलन,नृत्य कला आदि में सक्रिय रहती हैंl आप काव्य सहित विभिन्न विधाओं में लेखन करती हैंl १९८० से सतत लिखने में सक्रिय अलका जैन को हिन्दी भाषा का ज्ञान हैl प्रकाशन में उपन्यास-पामेला है तो रचनाओं का प्रकाशन लेख,ग़ज़ल,गीत,कहानी आदि के रूप में पत्र पत्रिकाओं में हुआ हैl इनके खाते में सम्मान के रूप में श्रीलाल शुक्ल स्मारक राष्ट्रीय संगोष्ठी समिति(हैदराबाद) से मान सहित मालवा रत्न, गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड और विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मान आदि हैl इनकी विशेष उपलब्धि हास्य का पुरस्कार मिलना हैl लेखनी का उद्देश्य-समय का सदुपयोग करना हैl प्रेरणा -कबीर दास जी हैंl रूचि नृत्य,सत्संग,फैशन,मुशायरे में शिरकत और लेखन हैl

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