इश्क

अक्षय दुबे
ग्वालियर(मध्यप्रदेश)

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मैं यह सोचकर निकला था इश्क के गलियारों से,
यंहा सुकून होगा पर यहां सितम और तन्हाई मिली।
लोगों को देखा है इन गलियों मे वादे-ए-वफ़ा करते हुए,
वादे वफ़ा सब झूठे निकले,हमको तो तन्हाई मिली॥

खुशियों को दौलत से तौला,लब पे प्रेम तराने थे,
लेकिन मुझे उन लोगों की यहां रुसवाई दिखी।
उनके फ़रेबों से मैं सदा परेशान ही रहा,
न वो मिली, न ही गम हटे,मुझे आवारगी मिली॥

ये जमाना कहता फिरता है इन गलियों में हसीन सपने हैं,
मुझे तो सिर्फ इन गलियों में उम्मीदें टूटती दिखी।
मैं यह सोचकर निकला था इश्क के गलियारों से,
यहां सुकून होगा पर यहां सितम और तन्हाई मिली।

परिचय : सामाजिक माध्यमों सहित ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय अक्षय दुबे की जन्मतिथि-५ सितम्बर १९९९ और जन्म स्थान-भिंड है। वर्तमान में मध्यप्रदेश राज्य के ग्वालियर में निवास हैं। बारहवीं उत्तीर्ण अक्षय दुबे बतौर विद्यार्थी सामाजिक क्षेत्र में रक्तदान को प्रोत्साहन देने के लिए सक्रियता से कार्य करते हैं। आपको-कविता और लेख रचने का शौक है। आपकी विधा कविता और लेख है। क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कुछ रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-हिन्दी का मान बनाए रखना है।

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