इश्क़ का महीना

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’
बसखारो(झारखंड)
***************************************************************************
लोग कहते हैं इश्क़ कमीना है,
हम कहते हुस्न का नगीना है।
देखो चली है मस्त हवा कैसी,
आ रहा मुहब्बत का महीना है।

जनवरी संग गुजर गयी सर्दी,
प्यार का ये फरवरी महीना है।
वेलेंटाइन तो पश्चिमी खिलौना,
यहां तो सदियों से ही मनता
रहा मदनोत्सव का महीना है।

सोलह श्रृंगार कर रही सजनी,
आ रहा उसका जो सजना है।
यमुना तट आया कृष्ण कन्हैया,
संग राधा नाचती ता-ता थैया है।
मुरली की धुन पर गोपियां क्या ?
वृंदावन की नाची सारी गैया है।

फूलों की सुगंध देखो मकरंद,
कैसा उड़ता फिरता बौराया है।
बागों में लगे हैं फूलों के झूले,
झूलती सजनी संग सजना है।
धरा पे पुष्पों सजा ये गहना है,
आया मुहब्बत का ये महीना है।

वंसतोत्सव में झूमता सदियों से,
आर्यावर्त का नाता ये पुराना हैl
प्रेम की हम करते हैं इबादत,
नहीं वासना का झूठा बहाना है।

कृष्ण,राधा का मीरा का माधव,
रति कामदेव का ही ये महीना हैl
आया मुहब्बत का ये महीना है,
इश्क़ वाला ये फरवरी महीना हैll

परिचय- पंकज भूषण पाठक का साहित्यिक उपनाम ‘प्रियम’ है। इनकी जन्म तारीख १ मार्च १९७९ तथा जन्म स्थान-रांची है। वर्तमान में देवघर (झारखंड) में और स्थाई पता झारखंड स्थित बसखारो,गिरिडीह है। हिंदी,अंग्रेजी और खोरठा भाषा का ज्ञान रखते हैं। शिक्षा-स्नातकोत्तर(पत्रकारिता एवं जनसंचार)है। इनका कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता और संचार सलाहकार (झारखंड सरकार) का है। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़कर शिक्षा,स्वच्छता और स्वास्थ्य पर कार्य कर रहे हैं। लगभग सभी विधाओं में(गीत,गज़ल,कविता, कहानी, उपन्यास,नाटक लेख,लघुकथा, संस्मरण इत्यादि) लिखते हैं। प्रकाशन के अंतर्गत-प्रेमांजली(काव्य संग्रह), अंतर्नाद(काव्य संग्रह),लफ़्ज़ समंदर (काव्य व ग़ज़ल संग्रह)और मेरी रचना  (साझा संग्रह) आ चुके हैं। देशभर के सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपको साहित्य सेवी सम्मान(२००३)एवं हिन्दी गौरव सम्मान (२०१८)सम्मान मिला है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय श्री पाठक की विशेष उपलब्धि-झारखंड में हिंदी साहित्य के उत्थान हेतु लगातार कार्य करना है। लेखनी का उद्देश्य-समाज को नई राह प्रदान करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-पिता भागवत पाठक हैं। विशेषज्ञता- सरल भाषा में किसी भी विषय पर तत्काल कविता सर्जन की है।

Hits: 8

आपकी प्रतिक्रिया दें.