उच्च कोटि के विद्वान थे गुरुदेव

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’
उदयपुर (राजस्थान )
****************************************************

(टैग-रविन्द्रनाथ टैगोर जंयती विशेष)
भारतीय साहित्य जगत के नभ पटल पर यूँ तो अनगिनत सितारे जगमगाते हैं,और सारे सितारों से ही रोशन यह नभ पटल है,उन्हीं सितारों में से एक अपनी प्रखर ज्योति से अलग स्थान बनाए हुए है,वो नाम है-गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर का। आज भी हमारे राष्ट्रीय उत्सव या आयोजन जिनके द्वारा रचित राष्ट्रगान `जन-गण-मन` के बिना अधूरा है,उस कालजयी रचनाकार,कवि, गीतकार को हम उनकी जन्मतिथि पर कोटिश:नमन करते हैं। ७ मई १८६१ को कोलकाता में माँ शारदा व पिता देवेन्द्र नाथ टैगोर के घर जन्म लेकर इन्होंने साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। अनेक भाषाओं का ज्ञान होने के साथ-साथ उच्च कोटि के नाटककार व गीतकार थे। प्रकृति प्रेमी गुरुदेव प्रकृति की शीतल व सुरम्य छाँव में बैठकर सुन्दर चित्र भी बनाया करते थे। देशभक्ति से ओत-प्रोत श्री टैगोर ने अनेक देशभक्ति कविताओं तथा लेखों से राष्ट्रीय भावना को बढ़ाने में अपना अतुलनीय योगदान दिया। उच्च कोटि के विद्वान,दार्शनिक श्री टैगौर आध्यात्मिकता की भी गहरी जानकारी रखते थे। `शांति निकेतन` जैसी ऐतिहासिक शिक्षण संस्था,शिक्षा के प्रति आपकी उत्कृष्ट देन को दर्शाती है। विश्ववंदेय यह भारत,आज विश्व पटल पर `विश्वगुरू` कहलाता है तो भारत को यह महान दर्जा दिलाने में श्री टैगोर जैसी महान शख्सियत का ही योगदान है।

विश्व में सांस्कृतिक दूत के नाम से ख्यात होकर आपने अपनी रचनाओं के माध्यम से विश्व की अन्य संस्कृतियों को जोड़ने का प्रयास कियाl भारतीय साहित्य जगत में कवि व गीतकार के रुप में आपका नाम जुगनू की भाँति सदैव चमकता रहेगा,साथ ही साहित्य के पथ पर अग्रसर साहित्यप्रेमियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। इस बहुमुखी प्रतिभा के धनी,महान व्यक्तित्व के बारे में लिखने के लिए शब्दकोष भी कम पड़ जाता है। आज भी रविन्द्र नाथ टैगौर द्वारा रचित साहित्य की अपनी ही प्रासंगिकता है।उनकी रचनाएँ वो भागीरथी हैं,जो कमजोर को तारती है,जहाँ से वह होकर गुजरती है,वो धरा शश्य-श्यामला होकर पुनीत हो जाती है।

परिचय – हेमलता पालीवाल का साहित्यिक उपनाम – हेमा है। जन्म तिथि -२६ अप्रैल १९६९ तथा जन्म स्थान – उदयपुर है। आप वर्तमान में सेक्टर-१४, उदयपुर (राजस्थान ) में रहती हैं। आपने एम.ए.और बी.एड.की शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। लेखन विधा-कविता तथा व्यंग्य है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-  साहित्यिक व सामाजिक सेवा है। 

Hits: 101

आपकी प्रतिक्रिया दें.