उड़ता पंजाब भाग-२

राकेश सैन
जालंधर(पंजाब)
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पंजाब में विधानसभा चुनाव के समय नशों को लेकर बनी हिंदी फिल्म ‘उड़ता पंजाब` के निर्माताओं के पास अवसर है कि वे एक बार फिर इस विषय पर मसाला फिल्म का निर्माण कर सकते हैंl नई फिल्म का नाम `उड़ता पंजाब भाग-२` या `उड़ता पंजाब रिटर्न्स बैक` या फिर `उड़ता पंजाब` रख सकते हैं। नशे जैसी सामाजिक समस्या पर राजनीति करते हुए सिख पंथ के धार्मिक ग्रंथ गुटका साहिब को हाथ में लेकर एक महीने में नशा समाप्त करने के दावे करने वाले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद्र सिंह को समझ आ गया होगा कि वचनवीर व कर्मवीर होना दो अलग-अलग विषय हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस दल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में नशे के पीछे न केवल तत्कालीन अकाली दल बादल और भारतीय जनता पार्टी गठजोड़ की सरकार के सिर असफलताओं का ठीकरा फोड़ा,बल्कि अकाली दल बादल के कुछ बड़े नेताओं के इस गंदे कारोबार में शामिल होने के गंभीर आरोप भी लगाए थे। राज्य में कांग्रेस सरकार के सत्तारूढ़ हुए सवा साल से भी अधिक का समय बीत चुका है,राज्य में नशा समाप्त तो क्या होना,बल्कि पहले के मुकाबले बढ़ा ही दिख रहा है। पिछले लगभग एक महीने में पूरे पंजाब में अत्यधिक नशे के सेवन के चलते ३० युवक अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं और पुलिस बल के जवान ही लोगों को नशे में धकेलते हुए पाए गए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री ने जहां लोगों से अपील की है कि,वे अपने बच्चों पर नजर रखें,वहीं मंत्रीमंडल ने स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट-१९८५) में संशोधन कर इसमें मौत की सजा का प्रावधान किया हैl जल्द ही यह अधिनियम स्वीकृति के लिए केन्द्र के पास भेजा गया है।
वैसे नशे की समस्या राज्य में काफी पुरानी है और इस पर खूब राजनीति हुई है। इसी समस्या को कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने विगत विधानसभा चुनावों में राजनीतिक मुद्दा बनाया और कुछ वरिष्ठ अकाली नेताओं पर इसमें शामिल होने के आरोप भी लगाए। अब यहाँ नशा पहले से भी अधिक भयानक रूप में समाज के सामने आज भी मुंह बाए खड़ा दिख रहा है। अकाली दल बादल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को ड्रग्स माफिया कहने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी सारी चंडाल चौकड़ी अदालत में माफी मांग चुकी है। कहने को तो कैप्टन अमरिंद्र सिंह ने भी सत्ता में आने के बाद छोटे-मोटे नशेडिय़ों को पकड़कर सक्रियता दिखाने का प्रयास किया,परंतु बड़ी मछलियां सरकार की पकड़ से बाहर रहीं। राज्य में इस मुद्दे की दोबारा वापसी उस समय हुई,जब लुधियाना की युवती ने एक डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी पर उसे नशे के कारोबार में धकेलने के आरोप लगाए और इस संबंध में वीडियो भी खूब फैला हुआ। देखते ही देखते इस तरह के प्रकरणों की बाढ़-सी आ गई। राज्य में नशे के अत्यधिक सेवन से मरने वाले युवाओं की संख्या में भी अचानक उछाल आना शुरू हो गया और पिछले एक महीने में ३० युवा अपनी जान गंवा चुके हैं। नशे से केवल साधारण युवकों का ही नहीं बल्कि मोगा,गुरदासपुर जिलों में अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों का जीवन तबाह होने के मामले भी सामने आए हैं। इस बीच राज्य के बुद्धिजीवी वर्ग ने सोशल मीडिया पर `काला सप्ताह` आयोजित करने की घोषणा कर दी जो जारी है,और इससे इस मुद्दे ने पुन: राजनीतिक रंग ले लिया है। अकाली दल बादल ने फरीदकोट जिले में १५ किलोमीटर लंबा मार्च निकालकर सरकार को नशे की समस्या के लिए जिम्मेवार बताया,वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसी दिन पूरे पंजाब में कांग्रेस के पुतले फूंके और प्रदर्शन किया। कैप्टन सरकार द्वारा मंत्रिमंडल की बुलाई गई आपात् बैठक इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस मोर्चे पर बचाव की मुद्रा में आ गई है।
राज्य में बीते कुछ दिनों से नशे की अधिकता से मरने वाले युवाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और नशे का प्रचलन भी बदला दिख रहा है। मालवा के कोटकपूरा से लेकर फिरोजपुर और बठिंडा जिला में जितने भी युवा नशे से मौत के आगोश में समाए हैं,सभी नशीले इंजेक्शन के आदी बताए जाते हैं। ऐतिहासिक शहर तलवंडी साबो में युवक बब्बू की रजावहे के पास लाश मिली थी। लाश के पास ही सीरिंज भी बरामद हुई। इसी तरह रामा मंडी के पार्षद के भाई की मौत के मामले में भी यही तथ्य सामने आया है। इससे साफ होता है कि नौजवान अब नशीले टीकों के आदी होने लगे हैं। सूबे में नशीली दवाओं और टीकों का सेवन पिछले कई दशकों से जारी है। इसके बाद इसकी जगह चिट्टा (हेरोइन) ने ले ली थी। जब चिट्टे के सौदागरों पर दबाव बढ़ा तो नौजवान नशीले टीकों के पीछे हो गए।
पंजाब में नशे से लगातार हो रही मौतों व भारी जनविरोध के चलते सीएम ने मंत्रिमंडल की आपात् बैठक में नशा तस्करों और सौदागरों को मृत्युदंड देने का निर्णय किया। हालांकि, इसके लिए अभी एनडीपीएस एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा जाना है। मंजूरी के बाद ही इसे लागू किया जा सकेगा। अभी स्पष्ट नहीं है कि ये सजा नशीले पदार्थ की कितनी मात्रा और कितनी बार दोषी पाए जाने पर दी जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिमंडलीय उप-समिति बनाई गई है। ये समिति हर हफ्ते नशे के खिलाफ हुई कार्रवाई की समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तस्करों ने युवाओं को बर्बाद कर दिया है। इन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सख्त कार्रवाई के लिए कैबिनेट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विशेष समूह बनाने का फैसला लिया,जो कार्रवाई की समीक्षा व निगरानी करेगा। अभी तक नशा तस्करी में १० से २० साल तक कैद और १-२ लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। सजा का फैसला पकड़े गए मादक पदार्थ की किस्म और मात्रा पर निर्भर करता है। नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले में ३ वर्ग लघु,अव्यवसायिक व व्यवसायिक है। दूसरी बार भारी मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकड़े व दोषी पाए जाने पर मौत की सजा का भी प्रावधान है। दूसरी ओर कानूनविदों का मानना है कि एनडीपीएस एक्ट में पहले से ही सख्त सजा का प्रावधान है ऐसे में मौत की सजा तर्कसंगत नहीं है। अक्सर ऐसे मामलों में कुछ लोगों को फंसा दिया जाता है। ऐसा करने से उनके सामने बचाव के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे।
पंजाब में फिर से इस मुद्दे पर राजनीति ब्यानबाजियां तेज हो चुकी हैं। अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि कांग्रेस दल व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद्रसिंह को अब पता चल गया होगा कि नशे पर उनकी राजनीति गलत थी। इस समस्या को राजनीति करने से नहीं,बल्कि इसके खिलाफ राजनीतिक एकजुटता से निपटा जा सकता है। नशे के खिलाफ राज्य सरकार जो भी कदम उठाए,हम उसका सहयोग करेंगे। हम चाहते हैं कि नशा समाप्त हो और पंजाब खुशहाली की राह पर चले। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक ने कहा है कि केवल नशा ही नहीं,बल्कि कांग्रेस सरकार बेरोजगारी,कृषि,राज्य में कैंसर आदि हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है। उन्होंने नशे के मुद्दे पर केन्द्रीय गृहमंत्री से मुलाकात कर विशेष सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस सामाजिक मुद्दे पर कांग्रेस की तरह ओछी राजनीति नहीं करेगी,बल्कि जिम्मेवार विपक्षी दल की भांति हर दायित्व का पालन करेगी। आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत सिंह मान ने मुख्यमंत्री से पूछा है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान गुटका साहिब की कसम खाई थी उसका क्या हुआ ? आपने कहा कि नशा राज्य में गंभीर समस्या है परंतु कैप्टन सरकार कभी भी इसको लेकर गंभीर नहीं दिखी। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी सुनील कुमार जाखड़ ने कहा कि ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी वायदे को पूरा करने का प्रयास नहीं किया। वे नशों की समस्या पर गंभीर हैं परंतु सरकारी मशीनरी में गड़बड़ी है जिसे ठीक किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का वायदा नशामुक्त पंजाब का था,जिसे हर कीमत पर पूरा किया जाएगा। नशा तस्करी में मौत की सजा का प्रावधान इसका साक्षी है कि राज्य सरकार कोई समझौता नहीं करने वाली है।

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