उम्मीद

श्रीमन नारायण सिंह‘राजपूत‘
चतरा(झारखण्ड)
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रात हो कितनी भी लम्बी,
सुबह को आना ही होगा।
मन यही हमेशा कहता है,
धर धीर तुझे लड़ना होगा।
कर संकल्प मन में निश्चय,
कदम को आगे अडिग बढ़ा।
आएगी कितनी भी मुश्किल,
हो सतत् सफल होना होगा।
तुम हो उम्मीदों की मीनार,
आशाएं तुमसे है हर बार।
तीर नहीं तलवार नहीं है,
भावों से होगा तुझ पर वार।
दुश्मन होंगे तेरे ही साथी,
ना दिया रहे ना होगी बाती।
डरना नहीं ना हारना श्री तू,
हिम्मत को बना ले हथियार।
असफल होना कभी हार नहीं,
यह हरदम कुछ सिखलाती है।
हमारे भीतर की कमियों को,
आकर सविस्तार बतलाती है।
हारो मगर ना भागो करनी से,
यही मंत्र तुम्हारा सतत् रहे।
संघर्ष करो और फल पाओ,
फिर स्वाद चखो कह जाती है।
जब कर्म तुम्हारे अच्छे होंगे,
परिणाम भी अच्छा ही होगा।
नीयत देखा करते हैं सबकी,
खुद का ना कभी सोचा होगा।
खुद को अगर सुधार सके हम,
बदलेगी दुनिया की तस्वीर।
हर तरफ हो नेकी और खुशी,
कभी तो ऐसा मंजर होगा।
परिचय: श्रीमन नारायण सिंह का उपनाम ‘राजपूत‘ है। आपकी जन्म तारीख १६ जून १९८५ तथा जन्मस्थान-चतरा(झारखण्ड) है। वर्तमान तथा स्थाई पता चतरा(झारखण्ड) ही है। झारखण्ड राज्य के ग्राम भोजेया,चतरा निवासी श्रीमन सिंह ने स्नातक (अर्थशास्त्र) की शिक्षा हासिल की है। फिलहाल कानून की पढ़ाई जारी है। आपका कार्यक्षेत्र लेखान्कन (स्वतंत्र) है। इनकी लेखन विधा-कविता है। आपको नवोदित कवि सम्मान(हजारीबाग) प्राप्त है। श्री सिंह के लेखन का उद्देश्य-सामाजिक चेतना के लिए जागरण करना है।

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