एक और…!

पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’
मुंबई(महाराष्ट्र)
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सुबह से मीनाक्षी प्रसव दर्द से कराह रही थी। कभी इस करवट तो कभी उस करवट,मगर दर्द बर्दाश्त के बाहर। मीनाक्षी के प्रसव दर्द की अवस्था अस्पताल की नर्स से भी न देखी जा रही थी। कोई सिर पर हाथ फेर अपनेपन का एहसास दे रही थी,तो कोई उसके पैरों के तलवों को सहला रही थी। उनमें से अधेड़ उम्र की एक नर्स मीनाक्षी के पास बैठ उससे बातें कर उसका ध्यान बंटाने का प्रयास करने लगी,मगर मीनाक्षी की स्थिति पूर्ववत…। पास में बैठी मीनाक्षी के परिवार की बुजुर्ग महिला जो उसकी दादी सास थी,पलंग पर बैठे-बैठे ही मीनाक्षी को दिलासा देते हुए कहती है-`कोई बात नहीं बहू,ऐसे नहीं करते। यूँ रोओ मत। ये तुम्हारा पहला बच्चा तो है नहीं। तुम इस प्रसव पीड़ा से पहले भी गुजर चुकी हो,ऐसे नहीं करते। चलो चुप हो जाओ।`

मीनाक्षी के लिए एक-एक पल पहाड़-सा लग रहा था। वह दर्द के कारण बेबस और लाचार थी। वह मन ही मन प्रार्थना कर रही थी-हे ईश्वर! बस मेरी होने वाली संतान हृष्ट-पुष्ट,तेजस्वी,विवेकशीलऔर भाग्यवान हो। अब मुझे और संतान की कामना नहीं है,बस इन दोनों का लालन-पालन ठीक से कर सकूँ तथा अपने मातृत्व का कर्त्तव्य निभाने में सक्षम रहूँ,यही मंगलकामना है।

सभी नर्स मीनाक्षी को धैर्य देती रही,कई बार गरमा-गर्म दूध भी पीने के लिए दिया,ताकि उसे प्रसूति के दौरान कोई परेशानी न हो। करीब दोपहर के बारह बजे नर्स ने प्रसूति कक्ष में सभी तैयारी के उपरांत चिकित्सक को इतला कर दी गई। मीनाक्षी को प्रसूति कक्ष में ले जाया गया। उसकी अवस्था अभी भी दर्द और चीख भरी थी।

इधर अस्पताल में भी उसके परिवार से बूढ़ी दादी सास के अतिरिक्त कोई न था। एक बजे उसने तंदुरुस्त,खूबसूरत और चंचल एक नन्हीं कली को जन्म दिया।

बेटी को देखते ही वह अपने सभी दुःख भूल गई।बहुत खुश थी वह आज,अपने माँ होने पर गर्व हो रहा था उसे।

मीनाक्षी को कुछ समय उपरांत वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। बहुत खुश थी,सच में बहुत खुश थी वह। वार्ड में प्रवेश करते ही उसने देखा कि,दादी उसकी बेटी को अपनी गोद में लिए बैठी है। दादी खुश थी,मगर उनकी ख़ुशी न तो उनके स्वर में थी,न ही उनके चेहरे पर। मीनाक्षी को बुरा लगा,मगर बेटी की ख़ुशी के कारण उसने दादी की बात को अनदेखा कर दिया।

मीनाक्षी के चेहरे पर उदित होते भावों को देख दादी कहती है-`एक और…! मीनाक्षी एक बेटा और बस…!`दादी की मंशा और विचारों ने मीनाक्षी को भीतर तक झकझोर दिया। यह बात सुन वह स्तब्ध रह गई `एक और…!`

परिचय-पूजा हेमकुमार अलापुरिया का साहित्यिक उपनाम ‘हेमाक्ष’ हैl जन्म तिथि १२ अगस्त १९८० तथा जन्म स्थान दिल्ली हैl श्रीमती अलापुरिया का निवास नवी मुंबई के ऐरोली में हैl महाराष्ट्र राज्य के शहर मुंबई की वासी ‘हेमाक्ष’ ने हिंदी में स्नातकोत्तर सहित बी.एड.,एम.फिल (हिंदी) की शिक्षा प्राप्त की है,और पी.एच-डी. की शोधार्थी हैंI आपका कार्यक्षेत्र मुंबई स्थित निजी महाविद्यालय हैl रचना प्रकाशन के तहत आपके द्वारा आदिवासियों का आन्दोलन,किन्नर और संघर्षमयी जीवन….! तथा मानव जीवन पर गहराता ‘जल संकट’ आदि विषय पर लिखे गए लेख कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैंl हिंदी मासिक पत्रिका के स्तम्भ की परिचर्चा में भी आप विशेषज्ञ के रूप में सहभागिता कर चुकी हैंl आपकी प्रमुख कविताएं-`आज कुछ अजीब महसूस…!`,`दोस्ती की कोई सूरत नहीं होती…!`और `उड़ जाएगी चिड़िया`आदि को विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्थान मिला हैl यदि सम्म्मान देखें तो आपको निबन्ध प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार तथा महाराष्ट्र रामलीला उत्सव समिति द्वारा `श्रेष्ठ शिक्षिका` के लिए १६वा गोस्वामी संत तुलसीदासकृत रामचरित मानस पुरस्कार दिया गया हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा में लेखन कार्य करके अपने मनोभावों,विचारों एवं बदलते परिवेश का चित्र पाठकों के सामने प्रस्तुत करना हैl

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