एक दीया जलाने आ गई

विद्या पटेल ‘सौम्य’
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
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ग़म-ए साज़ को सरगम से सजाने आ गई।
तान घुँघुरुओं से दर्द को भुलाने आ गई॥
उड़ाकर सर्द रेत में हिज़्र की सब दास्ताँ।
तेरी रूह में शै को मिटाने आ गई॥
ज़ुल्मत-ए-शब में सोया था जब जहाँ।
पहर चांदिनी में रब को मनाने आ गई॥
चुन-चुनकर बीनती रही ख़ाक से किऱचियां।
अश्क़ मोतियों से दश्त में लुटाने आ गई॥
तूफ़ां में दम-ख़म कहां रोक दे परवाज़ को।
एक दीया रस्ते में जलाने आ गई॥
परिचय-विद्या पटेल का साहित्यिक उपनाम-सौम्य है। १९८४ में १२ जुलाई को सौम्य,इलाहाबाद (उ.प्र.)में जन्मीं है। वर्तमान में इलाहाबाद स्थित शिवगढ़ सोरांव में निवास है। यही आपका स्थाई पता भी है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश निवासी विद्या पटेल की शिक्षा-एम.ए.(हिन्दी),बी.एड.सहित  जे.आर.एफ.(नेट) है। इनका कार्य क्षेत्र-अध्यापन का है। इनके लिए  प्रेरणा पुंज-समाज में होती विभिन्न घटनाएं हैं,जो लिखने को प्रेरित करती हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत आप साहित्य के माध्यम से समाज को जाग्रत करने में सक्रिय हैं,और लेखनी का यही उद्देश्य है। लेखन विधा-कविता,लेख एवं ग़ज़ल है।

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1 Comment

  1. आदरणीया विद्या सौम्य जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं कीर्तिमान स्थापित करने की शुभकामनाएं

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