एक पाती-जुल्म ढहाती सर्दी के नाम…..

डाॅ.देवेन्द्र जोशी 
उज्जैन(मध्यप्रदेश)

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हे सर्दी!
हो सके तो तुम अब चली जाओ। हालांकि,मुझे इस तरह साफ-साफ नहीं कहना चाहिए,लेकिन क्या करूं मजबूर हूँ। बुजुर्गों और बच्चों की हालत मुझसे देखी नहीं जाती। प्रशासन भी छुट्टी कर-कर थक गया है।लबादे ओढ़-ओढ़कर लोग अकुलाने लगे हैं। अतः,अब तुम चली जाओ। जानता हूँ मैंने ही तुम्हें बुलाने को पाती लिखी थी। अब मैं ही तुम्हें जाने को कह रहा हूँ, लेकिन मजबूर हूँ। झेलने की भी एक सीमा होती है। तुम्हारे सभी रूप तो देख चुके हैं। अब बचा ही क्या है जो तुम यहाँ टिकी हो। हाड़ तोड़,दांत किटकिटाने वाली,कंपकंपाने वाली,कुल्फी जमाने वाली,कोहरे में ढंकने वाली,गुलाबी,शबाबी,शराबी,फौलादी,रजाई- गादी,बेदर्द,कातिल-बातिल सभी तरह के रूप तो लोग देख चुके हैं। तो फिर जाते-जाते अपने बर्फानी तेवर दिखाकर क्यों बेवजह लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही हो। अब तो सूर्य भी उत्तरायण में आ गया है। प्रायः मकर संक्रांति तक तुम भी पारायण की ओर आ जाती हो,लेकिन इस बार तुम गजब ढा रही हो। जिनकी शादी है,जरा उनकी तो सोचो। आखिर तुम्हें हो क्या गया है ? कहीं तुम्हें किसी से प्यार तो नही हो गया है! क्योंकि ऐसी बहकी-बहकी हरकतें व्यक्ति प्यार और पागलपन में ही करता है,लेकिन शायद तुम्हें पता नहीं कि प्यार के दिवानों के साथ संसारी लोगों का सलूक कभी अच्छा नहीं रहा है। मुझे डर है कि प्यार के चक्कर में इस घर को अपना मानकर कुछ दिन और टिकी रही तो यहां के लोग तुम्हें दीवानों की तरह पत्थर मारने पर आमादा न हो जाएं। अत: बेहतरी इसी में है कि इज्जतदार मेहमान की तरह रवानगी ले लो,ताकि अगली बार आओ तो सबसे आँख मिलाकर बात कर सको।

परिचय–डाॅ.देवेन्द्र जोशी का निवास मध्यप्रदेश के उज्जैन में हैl जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६२ और जन्म स्थान-उज्जैन (मध्यप्रदेश)है। वर्तमान में उज्जैन में ही बसे हुए हैं। इनकी पूर्ण शिक्षा-एम.ए.और पी-एच.डी. है। कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता होकर एक अखबार के प्रकाशक-प्रधान सम्पादक (उज्जैन)हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप एक महाविद्यालय-एक शाला सहित दैनिक अखबार के संस्थापक होकर शिक्षा,साहित्य एवं पत्रकारिता को समर्पित हैं। पढ़ाई छोड़ चुकी १००० से अधिक छात्राओं को कक्षा १२ वीं उत्तीर्ण करवाई है। साथ ही नई पीढ़ी में भाषा और वक्तृत्व संस्कार जागृत करने के उद्देश्य से गत ३५ वर्षों में १५०० से अधिक विद्यार्थियों को वक्तृत्व और काव्य लेखन का प्रशिक्षण जारी है। डॉ.जोशी की लेखन विधा-मंचीय कविता लेखन के साथ ही हिन्दी गद्य और पद्य मेंं चार दशक से साधिकार लेखन है। डाॅ.शिवमंगल सिंह सुमन,श्रीकृष्ण सरल,हरीश निगम आदि के साथ अनेक मंचों पर काव्य पाठ किया है तो प्रभाष जोशी,कमलेश्वर जी,अटल बिहारी,अमजद अली खाँ,मदर टैरेसा आदि से साक्षात्कार कर चुके हैं। पत्रिकाओं सहित देश- प्रदेश के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्रों में समसामयिक विषयों पर आपके द्वारा सतत लेखन जारी है। `कड़वा सच`( कविता संग्रह), `आशीर्वचन`, आखिर क्यों(कविता संग्रह) सहित `साक्षरता:एक जरूरत(अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता वर्ष में प्रकाशित शोध ग्रन्थ) और `रंग रंगीलो मालवो` (मालवी कविता संग्रह) आदि आपके नाम हैl आपको प्राप्त सम्मान में प्रमुख रुप से अखिल भारतीय लोकभाषा कवि सम्मान, मध्यप्रदेश लेखक संघ सम्मान,केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड सम्मान,ठाकुर शिव प्रतापसिंह पत्रकारिता सम्मान,वाग्देवी पुरस्कार,कलमवीर सम्मान,साहित्य कलश अलंकरण और देवी अहिल्या सम्मान सहित तीस से अधिक सम्मान- पुरस्कार हैं। डॉ.जोशी की लेखनी का उद्देश्य-सोशल मीडिया को रचनात्मक बनाने के साथ ही समाज में मूल्यों की स्थापना और लेखन के प्रति नई पीढ़ी का रुझान बनाए रखने के उद्देश्य से जीवन लेखन,पत्रकारिता और शिक्षण को समर्पण है। विशेष उपलब्धि महाविद्यालय शिक्षण के दौरान राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद स्पर्धा में सतत ३ वर्ष तक विक्रम विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व और पुरस्कार प्राप्ति हैl आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता स्व.श्रीमती उर्मिला जोशी,पिता स्व.भालचन्द्र जोशी सहित डाॅ.शिवमंगल सिंह सुमन,श्रीकृष्ण सरल,डाॅ.हरीश प्रधान हैं। आपकी विशेषज्ञता समसामयिक विषय पर गद्य एवं पद्य में तत्काल मौलिक विषय पर लेखन के साथ ही किसी भी विषय पर धारा प्रवाह ओजस्वी संभाषण है। लोकप्रिय हिन्दी लेखन में आपकी रूचि है।

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