एक शाम…समाजसेवियों के साथ

कनक दांगी ‘बृजलता’
गंजबासौदा(मध्य प्रदेश) 
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     प्रकृति में विचरण करने वाले सभी जीवों में भावनाएं तो होती हैं,लेकिन जो दूसरों की भावनाओं को भी महसूस कर सकें,ऐसे लोग बिरले ही पाए जाते हैं। अपने लिए तो यहाँ प्रत्येक व्यक्ति जीता है, पर किसी अन्य के  लिए अपने जीवन से पल चुराने वाले लोग आज के समय में कम देखने को मिलते हैं। जहाँ आज भाई को फुरसत नहीं कि वह अपने सहोदर से घर का हाल पूछ ले,बेटे को समय नहीं पिता के साथ कुछ वक्त बांट सके,उस आधुनिक व्यस्त समय में समाजसेवियों की संस्थाएं जो कार्य करती हैं वह सराहनीय है। हमारे देश में लाखों समाजसेवी संस्थाएं वर्तमान समय में कार्यरत हैं,उन्हीं में से एक संस्था इनरव्हील क्लब है,जो मेरे शहर गंजबासौदा में विगत डेढ़ वर्ष से अपनी सेवाएं देती आ रही हैं। मुझे उस संस्था की अध्यक्ष रितिका अरोरा द्वारा एक शादी में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया। इससे पहले उनसे कभी नहीं मिली थी,लेकिन उनके विषय में इतना कुछ सुन रखा था कि परीक्षाओं की फिक्र किए बिना मैंने तुरन्त आने के लिए हामी भर दी।
रितिका दीदी के विषय में मुझे अपनी नवीन पुस्तक ‘मकान बिकाऊ है’ के विमोचन कार्यक्रम से दो दिन पहले ही पता चला। जब में नागरिक सेवा समिति के अध्यक्ष कांति भाई शाह व उपाध्यक्ष सुरेश कुमार तनवानी को अपने कार्यक्रम में पधारने का अनुग्रह लेकर गई थी। अनुग्रह को उन्होंने सहज ही सादर स्वीकार कर लिया तथा साथ ही रितिका अरोरा का परिचय मुझे दिया। मैं उनके बारे में जानकर इतनी उत्साहित हुई कि तुरन्त उन्हें अपने कार्यक्रम में आमंत्रित कर लिया। उन्होंने भी आने में दिलचस्पी जताई, लेकिन वह आ न सकीं,जिसका उन्हें खेद था,पर मुझे उससे कई अधिक एक स्वर्ण हृदय व्यक्ति से न मिल पाने का अफसोस था।
शायद यही कारण रहा होगा जो ईश्वर ने कुछ ऐसे संयोग बनाए कि,हम एक शादी समारोह में मिल ही लिए।
यह शादी कोई आम शादी नहीं है। समझना भी नहीं..इसलिए नहीं कि इस शादी में मुझे रितिका दीदी से मिलने का मौका मिला,न..बल्कि इसलिए क्योंकि यह शादी करवाई जा रही थी समाजसेवियों द्वारा। प्रजापति समाज की बेटी वर्षा की शादी कुछ समय पहले ही तय हो चुकी थी..तभी वक्त ने अपना कहर इस परिवार पर ढा दिया। परिवार के मुखिया,वर्षा के पिताजी का स्वास्थ्य  साथ नहीं दे रहा था। रात-दिन मजदूरी करके चलने वाली इस गृहस्थी की गाड़ी में धक्का लगाकर चलाने की स्थिति पैदा हो गई। वर्षा की माँ हर संभव प्रयास कर रही थी अपनी गृहस्थी की गाड़ी को चलाने का,पर उसी समय बिटिया की शादी सिर पर आ जाने से वह रही-सही कसर भी पूरी हो गई। ऐसे हालातों में उसकी मदद के लिए आगे आई समाजसेवी संस्था इनरव्हील क्लब, जिसकी अध्यक्ष रितिका अरोरा हैं। कार्य बड़ा था और उससे भी बड़ा था उनका हृदय,जो अब तय कर चुका था कि इस शादी में होने वाले सारे बड़े खर्चों का वहन उनकी संस्था करेगी।
मैं महसूस कर सकती हूँ कि उस समय यह सुनकर उस प्रजापति परिवार की क्या मनोदशा रही होगी। वह कहते हैं न..हर समय भगवान आपकी मदद के लिए आएं,यह आवश्यक नहीं,लेकिन कई बार वे अपने बंदों को भेज देते हैं,यह यकीन दिलाने कि अभी मैं देख रहा हूँ मेरे बच्चों! तुम अकेले नहीं हो मेरी बनाई सारी सृष्टि..मानव,जीव-जन्तु तुम्हारे मित्र हैं। जिसे मैंने बनाया है तुम्हारी मदद के लिए,और उनकी मदद करने के लिए तुम्हें।
दोपहर साढ़े तीन बजे मुझे तनवानी जी का फोन आया,उन्होंने बताया कि वह,कांति भाई शाह व रितिका अरोरा अपने क्लब के कुछ विशिष्ट सदस्यों के साथ मेरी राह देख रहीं हैं,मुझे जाना होगा अभी। मैंने पिताजी को बुलाया और हम निकल गए बताए हुए स्थान की ओर। यह स्थान मेरे निवास से ज्यादा दूर नहीं था, लेकिन फिर भी मैं आज तक इससे परिचित नहीं थी। कभी-कभी होता है न कि हमें दुनिया की खबर रहती है परन्तु पड़ोस में क्या घटित हुआ है पता तक नहीं रहता,कुछ वैसा ही मेरे साथ उस रोज हुआ। सही समय पर न पहुंच पाने से हमें उस शादी में पहुंचने में देरी हो गई,जिसके लिए मुझे बुलाया गया था।
पिताजी के साथ जब में वहां आगे बढ़ी,तब मैंने उन्हें पहली बार देखा। कहने को तो वह व्हील चेयर पर थी,पर मुझे वह किसी ‘सुपर लेडी’ से कम नहीं लगी। मुस्कुराता हुआ चेहरा स्वतः ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था। उनकी सादगी ने मुझे उनकी तरफ अत्यधिक आकर्षित किया। यही सादगी और सहजता मुझे कांति भाई शाह व तनवानी जी में नजर आई थी,जिसके कारण उनका हृदय से सम्मान करती हूँ,लेकिन यहाँ मामला ही अलग है.. उनकी उर्जा काबिल-ए-तारीफ है,जो किसी को भी प्रेरित करने की क्षमता रखती है।
हम सभी मतलब मैं और रितिका दीदी व समूह की अन्य पदाधिकारी मिनाली ओसवाल,आईएसओ मिथलेश शर्मा, रूपाली अग्रवाल एक वाहन में तथा तनवानी जी के साथ शाह जी दूसरे वाहन में निश्चित स्थान की ओर बढ़े। रास्ते में परिचय के साथ कुछ औपचारिक बातचीत भी हुई, कुछ हंसी-ठिठोली तो कुछ गंभीर विषयों पर भी चर्चा हुई। रास्ते में एक जगह हम लोग रास्ता भी भूले..। अब साहब शहर हर रोज अपना चेहरा बदलता है,रूप बदलता है,तो ऐसी स्थितियों में यह बहुत आम बात है। हो सकता है आज आप जहां घूमकर आएं,  वहां कुछ समय बाद जाने पर आप उस स्थान को पहचान भी न पाएं। परिवर्तन एक कटु सत्य है और आवश्यकता भी।
रास्ते में मेरे पूछने पर उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने बीते साल भी एक निर्धन कन्या का विवाह सम्पन्न करवाया था। रितिका दीदी का कहना था कि बेटियां सबकी सांझी होती है समाज का हिस्सा होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम उनके जीवन में जो बन पड़े,करें। उन्होंने बताया कि वह युवतियों को आत्मनिर्भर तथा सशक्त होने के गुर सिखाने के लिए क्लब द्वारा समय-समय पर शिविर आयोजित करती रहती हैं। मुझे उनका सेवाभाव व समूह की एकता देखकर गर्व हो रहा था कि,आज मेरे शहर में एक सशक्त महिला समूह है जो सिर्फ महिलाओं-युवतियों के लिए ही नहीं,वरन सभी के लिए आगे बढ़कर मदद करता है।
शादी वाले घर के दरवाजे पर हम लोग पहुंच चुके थे। प्रजापति परिवार के सदस्य स्वागतार्थ सामने थे। शादी सम्पन्न होने में समय शेष था,लेकिन समय के अभाव के चलते सभी साथ आए समाजसेवियों,नागरिक सेवा समिति व क्लब ने दुल्हन को उपहार स्वरूप वस्त्र व अन्य जीवन उपयोगी उपहार दिए।  शादी में मौजूद सभी लोगों के चेहरों पर खुशी नजर आ रही थी,जिसकी वजह बेशक समाजसेवियों का उनके मंगल संस्कार में आगमन रहा होगा। समूह के सदस्यों ने तैयारियों का जायज़ा लिया, साथ ही नव वधू को शुभ आशीष के साथ आने वाले जीवन के लिए शुभकामनाएं दी। मैंनेे बहुत अच्छा व कई अनुभवों को एकसाथ अनुभव करने वाला समय वहाँ गुजारा। अगर वहाँ सबसे ज्यादा मुझे उलझन में कोई लगा,तो वह दुल्हन थी। यह समय ही ऐसा होता है,जब उसकी जिंदगी एक बड़ा मोड़ लेने जा रही है,जिसे लेकर कई सारे विचार-विवाद उसके जहन में चल रहे थे। उसे उन उनझनों के साथ ही छोड़ हम लोग वहाँ से चलते हुए..। मुझे आज भी याद है उसका चेहरा,  लेकिन यह भी यकीन है कि आज वह खुश होगी। जैसे मैं हूँ एक अद्भुत अनुभवों वाले दिन की याद लिए।
आभारी हूँ क्लब की,जो उन्होंने अपनी एक शाम मेरे साथ साझा की। आशा करती हूँ आप सभी ऐसे ही लोगों में खुशियां बांटते जाएंगे व उनके दुखों को अपने प्रेम के धागों से काटते रहेंगे।
यकीनन आसान नहीं होता है यह कार्य, लेकिन जानती हूँ कि ईश्वर उन्हीं को नेक काम के लिए चुनता है,जिनमें उन जिम्मेदारियों को उठाने की क्षमता होती है।
परिचय-कनक दाँगी का जन्म १० मार्च १९९५ में वृन्दावन(मथुरा,उ.प्र.)में हुआ है। निवास वर्तमान में मध्य प्रदेश के विदिशा जिला स्थित गंजबासौदा में है। इनका उपनाम ‘बृजलता’ है। इन्होंने बी.ए.(अर्थशास्त्र) किया है,तथा एलएलबी में अध्ययनरत हैं। कार्यक्षेत्र में स्वतंत्र लेखक व व्यक्तिगत परामर्शदाता हैं। बृजलता के लिए वह हर वह वस्तु प्रेरणा पुंज है जो सोचने पर विवश कर दे। इसमें कुदरत से चींटी तक शामिल है। सुश्री दाँगी की लेखन विधा-कविता, कहानी,उपन्यास औऱ लेख आदि है। काव्याग्रह (कविता संग्रह-२०१६) प्रकाशित हो चुका है तो,स्थानीय तथा प्रदेश के पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है। आगामी कहानी संग्रह औऱ उपन्यास प्रकाशाधीन है। आप चित्रकारी सहित नौ भाषाओं के ज्ञान,अंकशास्त्र और ज्योतिष एवं समस्त धर्म शास्त्रों का अध्ययन रखती हैं।  अखिल भारतीय दाँगी क्षत्रिय गौरव सम्मान-२०१७ से आप सम्मानित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य आत्मिक शांति,समाज में बदलाव की आशा व साहित्य की ओर युवा वर्ग का रुझान जागृत करना है। 

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