ओढ़ रजाई

मधुसूदन गौतम ‘कलम घिसाई’
कोटा(राजस्थान)
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सुंदरी सवैया……….
यह शीतल भोर लगे रिपु ज्यो,घर बाहर कौन कहो चल जाई।
जब धुंध चढ़े तब कौन दिखे,बिनु आँख कहीं सकते टकराई।
नित रोज़ चले रमने वन में,पर आपस दांत पड़े कटकाई।
अजहूँ तज सोच न बाहर जा,बस सोवत ही रह ओढ़ रजाई।
परिचय-मधुसूदन गौतम का स्थाई बसेरा राजस्थान के कोटा में है। आपका साहित्यिक उपनाम-कलम घिसाई है। आपकी जन्म तारीख-२७ जुलाई १९६५ एवं जन्म स्थान-अटरू है। भाषा ज्ञान-हिंदी और अंग्रेजी का रखने वाले राजस्थानवासी श्री गौतम की शिक्षा-अधिस्नातक तथा कार्यक्षेत्र-नौकरी(राजकीय सेवा) है। कलम घिसाई की लेखन विधा-गीत,कविता, लेख,ग़ज़ल एवं हाइकू आदि है। साझा संग्रह-अधूरा मुक्तक,अधूरी ग़ज़ल, साहित्यायन आदि का प्रकाशन आपके खाते में दर्ज है। कुछ अंतरतानों पर भी रचनाएँ छ्पी हैं। फेसबुक और ऑनलाइन मंचों से आपको कुछ सम्मान मिले हैं। ब्लॉग पर भी आप अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-समय का साधनामयी उपयोग करना है। प्रेरणा पुंज-हालात हैं।

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