कद्रदार

अजय जयहरि ‘कीर्तिप्रद’
कोटा(राजस्थान)

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लगे कुछ अच्छा…
                      मजेदार न मिला।
बुरे वक्त में आए काम,
                    मददगार न मिला।
और जिसने सिखाया
                   सम्भल कर चलना।
वो भी निकला बेकार,
                   समझदार न मिला।
और कोशिश तो बहुत की,
                        प्यार करने की।
पर कद्रदार न मिला।
          अब तो जो भी मिलता है।
यह ही कहता है।
                       लुट गए मर गए।
बर्बाद हो गए…
                        चाहा जिसे वह।
प्यार न मिला॥
परिचय  – पेशे से शिक्षक अजय जयहरि का निवास कोटा(राजस्थान) स्थित शहर रामगंज मंडी की गिरधर कालोनी में है। श्री जयहरि का उपनाम-कीर्तिप्रद है।आपकी जन्मतिथि १८ अगस्त १९८५ तथा जन्म स्थान-रामगंजमंडी (कोटा) है। आपने स्नातकोत्तर तक शिक्षा(एम.ए.,बी.एड.) हासिल की है। लेखन विधा-कविता,नाटक,हास्य व्यंग्य है,साथ ही मंच पर काव्य पाठ भी करते हैं। आपकी रचनाओं में ओज,हास्य रस और छायावादी शैली की झलक है। कई पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कविताओं का प्रकाशन होता रहता है। आपका कार्यक्षेत्र-मंचासीन कवि व शिक्षक का है। मां शारदा काव्य संग्रह आपके नाम है। आपको त्रिवेणी सम्मान(छत्तीसगढ़), ज्ञानोदय साहित्य सेवा सम्मान(कर्नाटक) और रचना साहित्य रत्न (छत्तीसगढ़) मिल चुका है। आप ब्लॉग पर भी लेखन करते हैं। श्री जयहरि की लेखनी का उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन करना है।

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