कभी-कभी

राम भगत किन्नौर
*******************************************************************
कभी-कभी हम,
बहुत आगे बढ़ते हैं।
और हम पीछे बहुत
कुछ छोड़ जाते हैं।
रह जाता है पीछे समय अपनापन,
और बहुत सारी यादें।
आगे बढ़ना भी,
अपनी चाहत थी।
पीछे छूट गये जो,
साथ चलने की चाहत थी।
जो छूट जाते हैं पीछे वो,
अपनों को नहीं भूल पाते।
जो आगे बढ़ते हैं अपनों को
छोड़कर वे बहुत कु़छ खो देते हैं।

Hits: 10

आपकी प्रतिक्रिया दें.