कभी छांव तो धूप है अम्मा 

प्रियांशु तिवारी ‘सागर’
कटनी(मध्यप्रदेश)
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माँ न हो तो घर पूरा परिवार नहीं,
माँ से बढ़कर धरती,ये संसार नहीं 
जिसने हमको पाला पोसा,
जिसने हमको यह सिखलाया
इस धरती के लिए बना तू,
जिसने हमको यह बतलाया 
माँ  की ममता से बढ़कर उपहार नहीं,
माँ से बढ़कर धरती,ये संसार नहींl  
 
जिसने खुद को भूखा रखकर, 
हम बेटों की भूख मिटाई
समय-समय की सभी जरूरत,
कैसे भी पूरी करवाई 
माँ के जैसा जग में वो व्यवहार नहीं, 
माँ से बढ़कर धरती,ये संसार नहींl 
 
मन में सारे दर्द छुपाए,
चेहरे में मुस्कान बनाए 
रहती थी अम्मा घर में बस,
हम सबको ऐसे बहलाए
इस दुनिया में अम्मा जैसा प्यार नहीं,
माँ से बढ़कर धरती,ये संसार नहींl 
 
घर-आंगन में दीप जलाती, 
ईश्वर का स्वरूप है अम्मा
स्वंय झेलती दुख-दर्दों को, 
कभी छांव तो धूप है अम्मा
माँ के बिन दुनिया का आधार नहींl 
माँ से बढ़कर धरती,ये संसार नहींll 
परिचय-प्रियांशु तिवारी का साहित्यिक उपनाम `सागर` हैl आप जिला कटनी(राज्य मध्यप्रदेश)में रहते हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,मुक्तक( ओज रस)हैl आपको कविताएँ लिखना  बेहद पसंद हैl 

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