कमजोर नहीं हूँ

कनक दांगी ‘बृजलता’
गंजबासौदा(मध्य प्रदेश) 
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दूर रखना,
अपने नापाक इरादे
मुझे भांपना आता है,
फूल नहीं हूँ मैं
गल मुण्डों की माला है।
क्षत्राणी हूँ,
हथियारों संग
बचपन से मेरा पाला है।
हाथ बढ़ाया
जो दामन तक,
मुझे भुजा काटना आता है।
कमजोर नहीं हूँ
तुझसे मैं…,
मेरे अंदर ज्वाला है।
कर दूं खाक तुझे
इरादों संग तेरे,
मेरे खूं का मुझे
हवाला है॥
परिचय-कनक दाँगी का जन्म १० मार्च १९९५ में वृन्दावन(मथुरा,उ.प्र.)में हुआ है। निवास वर्तमान में मध्य प्रदेश के विदिशा जिला स्थित गंजबासौदा में है। इनका उपनाम ‘बृजलता’ है। इन्होंने बी.ए.(अर्थशास्त्र) किया है,तथा एलएलबी में अध्ययनरत हैं। कार्यक्षेत्र में स्वतंत्र लेखक व व्यक्तिगत परामर्शदाता हैं। बृजलता के लिए वह हर वह वस्तु प्रेरणा पुंज है जो सोचने पर विवश कर दे। इसमें कुदरत से चींटी तक शामिल है। सुश्री दाँगी की लेखन विधा-कविता, कहानी,उपन्यास औऱ लेख आदि है। काव्याग्रह (कविता संग्रह-२०१६) प्रकाशित हो चुका है तो,स्थानीय तथा प्रदेश के पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है। आगामी कहानी संग्रह औऱ उपन्यास प्रकाशाधीन है। आप चित्रकारी सहित नौ भाषाओं के ज्ञान,अंकशास्त्र और ज्योतिष एवं समस्त धर्म शास्त्रों का अध्ययन रखती हैं।  अखिल भारतीय दाँगी क्षत्रिय गौरव सम्मान-२०१७ से आप सम्मानित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य आत्मिक शांति,समाज में बदलाव की आशा व साहित्य की ओर युवा वर्ग का रुझान जागृत करना है। 

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