करते क्यों आघात

रामचन्द्र ममगाँई `पंकज`
घनसाली (उत्तराखंड)

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भाषा मेरी प्रेम की,मैं लिख दूँ भरपूर।
हुए सभी बदनाम तो,मीरा राधा सूर॥
लिखते रहना तूलिका,जन्म-मरण का साथ।
पूरी हो मन कामना,मेरी भोलेनाथ॥
वादा रहने साथ का,करते थे दिन-रात।
सपनों में आया करो,करते क्यों आघात॥
परिचय-रामचंद्र ममगाँई का साहित्यिक नाम-पंकज हैl जन्म तारीख १५ मई १९९६ और जन्म स्थान-घनसाली (उत्तराखंड)है। वर्तमान में हरिद्वार स्थित देवपुरा चौक में निवासरत हैं,जबकि  स्थाई पता घनसाली(टिहरी,गढ़वाल)है।उत्तराखंड राज्य के श्री ममगाँई ने शास्त्री और शिक्षा शास्त्री की पढ़ाई की है।कार्यक्षेत्र में फिलहाल छात्र हैं।सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत सामाजिक समस्याओं पर आलेख व कविता लेखन करते हैं। इनकी लेखन विधा-लेख और कविता है। अनेक समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में कविता तथा लेख का प्रकाशन हो चुका है। आपकी विशेष उपलब्धि-संस्कृत भाषा लेखन है। पंकज की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक समस्याओं का समाधान पाठकों तक पहुंचाना है। रुचि-लेखन एवं भ्रमण में है।

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