कलम विरुद्ध मलिक

सुषमा मलिक 
रोहतक (हरियाणा)

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रो पड़ी कलम ओर बोली-क्यों अपना दर्द मुझे बतलाती है,
आंसू से लथपथ लफ़्ज क्यों पगली मेरी धार से लिखवाती है।
अपने भी अब साथ नहीं अब कलम ही तो मेरा हमसाया है,
`मलिक` ने बता डाले हर दर्द यही तो अब दिल को भाया है।
कलम बोली-लिख हिम्मत से क्यों दर्दों को तू यूं सहती है,
पोंछ डाल हर उस आंसू को जो तेरी आंख से बहता है।
आँसू भी तो दिए हैं अपनों ने इन्हें तू ही बता छिपाऊँ कहाँ,
रास्ते सारे बन्द हुए सूझे न कुछ भी `मलिक` जाऊं कहाँ।
अकेली आगे बढ़ जा बावरी हर हिम्मत तुझे जुटानी होगी,
एहसान है किसी सहारे का वो पहचान तुझे मिटानी होगी।
सुन सारी बात कलम की,`सुषमा` ने बस दिल में ठानी है,
फट जाए चाहे पाँव कांटों से,अपनी राह तुझे बनानी हैll

परिचय : रोहतक निवासी सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक स्थित शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक का कार्यक्षेत्र विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल का है। आप सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरन्तर आती रहती हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख साहित्यिक संस्था सहित अन्य संस्थाओं ने भी आपको सम्मानित किया है। आपकी दृष्टि से लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।

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