कविता तो कविता होगी

ऋषभ तोमर ‘राधे’
मुरैना(मध्यप्रदेश)
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जो आँख मौन है सदियों अब उनमें भी सरिता होगी,

दरबारी कोई गीत नहीं,बस कविता तो कविता होगी।
तुलसी केशव कालिदास-सा कोई ज्ञान नहीं होगा,
रक्त पिपासा का कविता में कोई भान नहीं होगा।
मानव उर की पीड़ा के संग माँ की भी ममता होगी,
दरबारी कोई गीत नहीं,बस…॥
मीरा के छंदों-सी बंधों-सी कुछ तो करुणा होगी,
मोहन की मूरत-सी उसमें प्यारी-सी तरूणा होगी।
सच की कविता के सम्मुख,उसमें कुछ मृदुता होगी,
दरबारी कोई गीत नहीं,बस…॥
ताकत के मद भूल गए जो धर्म प्रजा की बोली को,
मजहब की तलवारों से जो रोज खेलते होली को।
कविता उनको ललकारेगी जिनकी अक्षम्य खता होगी,
दरबारी कोई गीत नहीं,बस…॥
मानवता के उपवन में,उन्माद जगाने वालों को,
श्वेत वस्त्र धरण पर उर से गंदे व कुछ कालों को।
सच कहता हूँ काव्य धार में उनके प्रति कटुता होगी,
दरबारी कोई गीत नहीं,बस…॥
दिनकर पंत निराला जैसी उसमें एक चमक होगी,
मानवता पूजेगी जिसको वैसी एक खनक होगी।
लेकिन कविता को मानव की पीड़ा खूब पता होगी,
दरबारी कोई गीत नहीं,बस कविता तो कविता होगी॥
परिचय-ऋषभ तोमर मध्यप्रदेश के शहर अम्बाह (जिला मुरैना) में रहते हैं। उपनाम ‘राधे’  है। इनकी जन्म तिथि १४ अक्टूबर  १९९७ है। आपने स्नातक (गणित) किया हुआ है।  लेखन विधा -गीत  है । इनके लेखन का उद्देश्य मानसिक संतुष्टि है।

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